वस्तु एवं सेवा कर नागरिक-हितैषी होना चाहिए : सुप्रीम कोर्ट

कर अधिकारी संपत्ति को कुर्क नहीं कर सकते हैं और यह एक 'पूर्व-नियोजित प्रहार' नहीं हो सकता

नई दिल्ली | सुप्रीम कोर्ट ने कर अधिकारियों द्वारा वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू करने के तरीके के खिलाफ तीखी टिप्पणी करते हुए बुधवार को कहा कि सभी करदाता व्यवसायों को धोखाधड़ी के रूप में नहीं देख सकते हैं।

जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और एमआर शाह की पीठ ने कहा, “संसद ने जीएसटी को नागरिक-अनुकूल कर संरचना बनाने का इरादा किया था..जिस तरीके से इस अधिनियम को हमारे देश में लागू किया जा रहा है, उससे इसका उद्देश्य खो गया है।”

हिमाचल प्रदेश वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) अधिनियम के तहत अल्पकालिक कुर्की (प्रोविजनल अटैचमेंट) के अधिकारों को चुनौती देने वाली एक याचिका की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणियां की। यह याचिका राधा कृष्ण इंडस्ट्रीज की ओर से दायर की गई थी। कंपनी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता पुनीत बाली और अधिवक्ता सुरजीत भादू अपना रक्षा रख रहे थे।
GST should be citizen-friendly, provisional attachment draconian: SC
बहरहाल, सुनवाई के दौरान पीठ ने उल्लेख किया कि कर अधिकारी संपत्ति को कुर्क नहीं कर सकते हैं और यह एक ‘पूर्व-नियोजित प्रहार’ नहीं हो सकता। पीठ ने अल्पकालिक कुर्की (प्रोविजनल अटैचमेंट) को ड्राकोनियन (बेहद कठोर) बताया।

कंपनी ने पीठ के समक्ष दलील दी कि धारा 83 के तहत कुर्की का अधिकार ड्राकोनियन (बेहद कठोर) है।

इस धारा के अनुसार, कर कार्यवाही की पेंडेंसी के दौरान, विभाग अल्पकालिक कुर्की के तौर पर किसी भी संपत्ति (बैंक खातों और प्राप्य खातों सहित) को कुर्क कर सकता है। कर अधिकारी इसे अदालतों द्वारा बाद के फैसले की संतुष्टि की गारंटी के लिए एक उपाय के रूप में उपयोग करते हैं।

पीठ ने कहा कि राजस्व के हितों की रक्षा और वास्तविक व्यवसायों की रक्षा के बीच एक संतुलन बनाए रखना होगा। इसने कहा, “देश को इस कर संस्कृति से बाहर आने की जरूरत है कि सभी व्यवसाय धोखेबाज हैं..वह भी तब जब 12 करोड़ रुपये का कर चुकाया गया है। आप केवल इस आधार पर संपत्ति की कुर्की प्रारंभ नहीं कर सकते कि कुछ करों का भुगतान करना अभी बाकी है।”

–आईएएनएस

संबंधित पोस्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कोविड प्रबंधन का लिया संज्ञान, केंद्र की क्या योजना है ?

नीट पीजी परीक्षा स्थगित कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंचे डॉक्टर

बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी महाराष्ट्र सरकार

परमबीर की याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट भेजा

सुप्रीम कोर्ट ने मोरेटोरियम के दौरान बैंकों पर ब्याज पर ब्याज लगाने से लगाई रोक

स्थानीय निकायों में ओबीसी कोटा की सीमा 50 फीसदी का उल्लंघन न हो : सुप्रीम कोर्ट

ओटीटी कंटेंट को रेगुलेट करने के लिए क्या कदम उठा रही है सरकार : सुप्रीम कोर्ट

विरोध का अधिकार कभी भी और हर जगह नहीं हो सकता : सुप्रीम कोर्ट  

सुशांत मामले में सीबीआई की चुप्पी पर सवाल उठाना है तो हाईकोर्ट जाएं : सुप्रीम कोर्ट  

एफआईआर के खिलाफ थरूर, सरदेसाई और अन्य ने सुप्रीम कोर्ट रूख किया

सुप्रीम कोर्ट ने एफआईआर दर्ज करने संबंधी याचिका पर विचार से किया इनकार

सशस्त्र बलों में व्यभिचार मामला : सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी किया