महाराष्ट्र सरकार : सुप्रीम कोर्ट ने मांगा राज्यपाल का पत्र

सुप्रीम कोर्ट ने कल सुबह 10:30 बजे तक का दिया समय

नई दिल्ली। रातों रात महाराष्ट्र में बनी सरकार पर अब सुप्रीम कोर्ट ने दखल दिया है। सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा कांग्रेस, शिवसेना और एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने खटखटाया था। कोर्ट में दायर याचिका के पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने महाराष्ट्र की सरकार और उसके गठन पर सवाल उठाए है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार और महाराष्ट्र सरकार को नोटिस जारी कर कल सुबह 10:30 बजे तक का राज्यपाल के सरकार बनाने के आमंत्रण वाली चिट्ठी पेश करने का निर्देश दिया है। वही सुप्रीम कोर्ट ने फ्लोर टेस्ट जैसे मसलों पर अभी कोई फैसला नहीं दिया है, लेकिन इसके साथ ही कोर्ट ने इस बात को भी ठुकराया है कि बहुमत साबित करने के लिए कोई समय दिया जाएगा। सुनवाई के दौरान कोर्ट में यह पूछा गया कि समर्थन पत्र कब दिया वही जस्टिस रमन्ना ने कांग्रेस के वकील कपिल सिब्बल से यह पूछा कि क्या उनके पास कुछ है जो राज्यपाल द्वारा लिखित में दिया गया था, इस पर कपिल सिब्बल ने ना में जवाब देते हुए बीजेपी की तरफ पाला देखा और कहा कि अगर बीजेपी के पास बहुमत है तो वे साबित करें।

आज की सुनवाई में भाजपा को कोर्ट में तीनों राजनैतिक दलों के वकीलों ने चतुराईपूर्ण राजनीतिक पैंतरेबाज़ी के साथ महाराष्ट्र में सरकार बनाने की बात कहीं है। बताया गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से विशेष मंजूरी के साथ सुबह 6 बजे से पहले राष्ट्रपति शासन रद्द कर दिया गया था, राज्यपाल ने देवेंद्र फड़नवीस को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया था। शपथ समारोह सुबह 7.50 बजे हुआ। जिसमें शरद पवार के भतीजे अजीत पवार ने फड़नवीस के डिप्टी के रूप में शपथ ली।
इधर यह पूरा मामला संख्याबल पर टिका हुआ है। इधर भाजपा का दावा है कि उसे एनसीपी के 54 विधायकों का समर्थन प्राप्त है। पवार की पार्टी ने यह कहते हुए इसका खंडन किया कि अजीत पवार ने राज्यपाल को गुमराह किया था, विधायकों की सूची के साथ एक पत्र प्रस्तुत किया जो गठबंधन को समर्थन पत्र दिखाने के लिए था। राकांपा का कहना है कि उसके साथ 50 विधायक हैं, जिनमें से ज्यादातर कल शाम एक बैठक में शामिल हुए थे जिसमें अजीत पवार को विधायक दल के नेता के पद से हटा दिया गया था।

अभिषेक सिंघवी ने कहा, “यह विश्वासघात है। गवर्नर ने कोई सामग्री नहीं मांगी … सुप्रीम कोर्ट ने 24 घंटे के भीतर कर्नाटक फ्लोर टेस्ट का आदेश दिया था।” शिवसेना की तरफ से ज़िरह कर रहे पूर्व केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा, ” उनका समर्थन है, उन्हें फ्लोर टेस्ट लेने के लिए निर्देशित किया जाना चाहिए”।

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