ग्रामीण भारत बंद का पुरे देशभर में दिखा मिला जुला असर

दूध, अनाज, फल एवं सब्जियों की आवक हुई प्रभावित

नई दिल्ली / रायपुर | देश के किसान और श्रमिक संगठनों द्वारा किए गए ग्रामीण भारत बंद के कारण आज देशभर में दूध, अनाज, फल एवं सब्जियों की आवक प्रभावित हुई। किसानों की लंबीत मांगों को लेकर देशभर के 250 किसान संगठनों ने अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति (AIKSCC) के बैनर तले इसका आयोजन किया गया। मजदूर संघों के केंद्रीय संगठनों ने भी केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ भारत बंद का ऐलान किया है। केंद्रीय श्रमिक संगठनों की 12 सूत्रीय प्रमुख मांगों में देश में मजदूरों के लिए लागू हुए नए श्रम कानून को लेकर है और सरकार से उनकी मांग है कि वह इस कानून को वापस ले। इस भारत बंद में 19 केंद्रीय ट्रेड यूनियन शामिल हैं।ग्रामीण भारत बंद के दौरान मोदी सरकार की खेती, कृषि उत्पादन तथा विपणन में देशी-विदेशी कारपोरेट कंपनियों की घुसपैठ का जमकर विरोध किया गया। किसान आत्महत्याओं की जिम्मेदार नीतियों की वापसी, खाद-बीज-कीटनाशकों के क्षेत्र में मिलावट रोकने, स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट पर अमल करने की मांग प्रमुख रूप की गई।

श्रमिक और किसान नाराज
आंदोलनकारियों का आरोप है कि केंद्र सरकार निजीकरण को बढ़ावा दे रही है, पुरानी पेंशन योजना लागू नहीं कर रही, वेतनमानों में सुधार नहीं किया जा रहा, बैंकों का विलय कर रोजगार के अवसर कम किए जा रहे हैं, उद्योगपतियों को दिए गए कर्ज की वसूली न करके उन्हें इससे मुक्त किया जा रहा है। वहीँ किसान संघो ने भी राज्य सरकार पर भी किसानो के कर्ज को पूरी तरह से माफ़ नहीं किये जाने पर रोष दिखाया।

रायपुर में श्रमिकों और किसानो ने दिखाई एकजुटता
रायपुर में ट्रेड यूनियन हड़ताल के समर्थन में बैंक, बीमा व तृतीय, चतुर्थ वर्ग के सैकड़ों कर्मचारी यहां सप्रे स्कूल मैदान में एकजुट हुए। इसके बाद वे सभी नारेबाजी करते हुए धरने पर बैठ गए। धरना सभा को धर्मराज महापात्र, बी.सान्याल, एनके नंदी, नरेंद्र चंद्राकर समेत कई ट्रेड यूनियन नेताओं ने संबोधित किया। अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति और भूमि अधिकार आंदोलन सहित देश के 228 किसान संगठनों ने देशव्यापी ग्रामीण भारत बंद का आव्हान किया। इसी क्रम में छत्तीसगढ़ में भी किसानों और दलित-आदिवासियों से जुड़े 25 से ज्यादा संगठनों ने छत्तीसगढ़ बंद को समर्थन किया। इस दौरान जगह-जगह रास्ता रोको आंदोलन चलाया गया। वहीं रैली निकालकर भी धरना-प्रदर्शन किया गया। आंदोलन से बैंक, बीमा व सरकारी दफ्तरों का काम ज्यादा प्रभावित रहा। यहां तक की आंगनबाड़ी केंद्रों, कृषि उपज मंडियों में भी कामकाज प्रभावित रहा।

भूपेश सरकार के खिलफ भी नारेबाजी
साथ ही छत्तीसगढ़ सरकार से किसानों को मासिक पेंशन देने, कानून बनाकर किसानों को कर्जमुक्त करने, पिछले दो वर्षों का बकाया बोनस देने और धान के काटे गए रकबे को पुन: जोडऩे, फसल बीमा में नुकसान का आंकलन व्यक्तिगत आधार पर करने, विकास के नाम पर किसानों की जमीन छीनकर उन्हें विस्थापित करने पर रोक लगाने, अनुपयोगी पड़ी अधिग्रहित जमीन को वापस करने, वनाधिकार कानून, पेसा और 5वीं अनुसूची के प्रावधानों को लागू करने, मनरेगा में हर परिवार को 250 दिन काम और 600 रुपये रोजी देने, मंडियों में समर्थन मूल्य सुनिश्चित करने, सोसाइटियों में किसानों को लूटे जाने पर रोक लगाने, जल-जंगल-जमीन के मुद्दे हल करने और सारकेगुड़ा कांड के दोषियों पर हत्या का मुकदमा कायम करने की मांग की गई। दूसरी ओर नागरिकता कानून को रद्द करने और एनआरसी-एनपीआर की प्रक्रिया पर विराम लगाने की पुरजोर मांग उठाई गई।

मध्यप्रदेश में भी असर
इधर मध्य प्रदेश में हड़ताल से लगभग पांच हजार बैंक शाखाओं के कामकाज प्रभावित हुए हैं। लेन-देन पूरी तरह बंद है, बैंक शाखाओं के बाहर ताले लटके हुए हैं। राजधानी भोपाल के अलावा इंदौर, ग्वालियर सहित अन्य स्थानों पर रैलियां निकाली जा रही हैं। विरोध प्रदर्शन जारी है। इस हड़ताल का हालांकि परिवहन सेवा पर कोई असर नहीं है। इस हड़ताल में मध्य प्रदेश के बिजली कर्मचारी भी शामिल हैं।

बंद के दौरान बंगाल में हिंसा
पश्चिम बंगाल के मालदा जिला स्थित सुजापुर में ‘भारत बंद’ के दौरान क्रोधित प्रदर्शनकारियों ने बुधवार को एक पुलिस वाहन में आग लगा दी और सुरक्षा बलों पर पत्थर व बम फेंके। वहीं पुलिस ने स्थिति को काबू में करने के लिए प्रदर्शनकारियों पर रबड़ की गोलियां और आंसूगैस के गोले दागे।आंध्रप्रदेश में बंद के दौरान सड़क पर नाकाबंदी करने और राज्य के स्वामित्व वाली बसों को रोकने की कोशिश करने पर पुलिस ने वामपंथी दलों और ट्रेड यूनियनों के नेताओं को गिरफ्तार कर लिया। इधर त्रिपुरा में आम जनजीवन प्रभावित हुआ।

दिल्ली प्रभाव से दूर
बंद से दिल्ली में यातायात पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है। वाम दलों और कांग्रेस से जुड़े कई ट्रेड यूनियनों ने बुधवार को महा हड़ताल की घोषणा की है। मुनिरका और शहर के अन्य हिस्सों में यातायात आम दिनों की तरह रहा। इस दौरान व्यापारिक और वाणिज्यिक संस्थान भी खुले रहे। आईटीओ जाने वाले शहीद पार्क रोड जैसे कुछ क्षेत्रों को प्रदर्शनकारियों के मार्च के कारण बंद कर दिया गया।

ओडिशा में दिखा बंद का असर
ओडिशा में ज्यादातर जिलों में शिक्षण संस्थान बंद रहे, वहीं राज्य के विभिन्न हिस्सों में वाणिज्यिक संस्थान और बैंक बंद रहे हड़ताल से जेईई मुख्य परीक्षा 2020 समेत कई प्रवेश परीक्षाएं भी प्रभावित हुईं। बंद के कारण बस और ट्रेन सेवाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा। आपातकालीन सेवाओं पर हालांकि कोई प्रभाव नहीं पड़ा। तालचेर, भुवनेश्वर, बृह्मपुर, भद्रक और क्योंझर समेत विभिन्न रेलवे स्टेशनों पर रेल सेवा प्रभावित रही।

बिहार और झारखंड हल्का असर
बिहार और झारखंड में मिलाजुला असर देखा गया। झारखंड में अन्य क्षेत्रों में बंद का कोई खास असर नहीं दिख रहा है, परंतु कोयलांचल में बंद का प्रभाव दिख रहा है। बिहार की राजधानी सहित कई क्षेत्रों में बंद के समर्थन में श्रमिक संगठनों के लोग सड़क पर उतरे और जुलूस निकाला।

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