जम्मू कश्मीर : श्रीनगर में फ़िर लगा कर्फ़्यू, महीने भर का राशन हुआ स्टॉक

जम्मू कश्मीर में तगड़ी सुरक्षा में मनाई जाएगी बक़रीद

श्रीनगर। जम्मू कश्मीर में केंद्र सरकार के कल के प्रतिबंधों के हटाने बाद छिटपुट झड़पें हुईं है। जिसके एक दिन बाद श्रीनगर में बड़े समारोहों पर प्रतिबंध लगाने वाले प्रतिबंधात्मक आदेश आज फिर से लागू किए गए। रविवार को जम्मू-कश्मीर नागरिक प्रशासन ने कहा कि रिश्तेदारों के साथ सार्वजनिक संवाद स्थापित करने में मदद के लिए 300 विशेष टेलीफोन बूथ स्थापित किए जा रहे हैं। सोमवार को ईद के त्योहार से पहले क्षेत्र में कई स्थानों पर कर्फ्यू में ढील दी गई थी, हालांकि कम्यूनिकेशन लाइनों पर अब भी सख्ती बरकरार है।

                                 नागरिक प्रशासन ने कहा कि जम्मू और कश्मीर के छात्रों को ईद के अवसर पर उनके परिवारों से संपर्क करने में मदद करने के लिए अलीगढ़ सहित विभिन्न स्थानों में नई दिल्ली में रेजिडेंट कमिश्नर के माध्यम से अधिकारियों को सक्रिय किया गया है। यह भी बताया कि सरकार ने क्षेत्र में लगाए गए कर्फ्यू के मद्देनजर आवश्यक वस्तुओं की पर्याप्त स्टॉकिंग की थी।

                  प्रशासन द्वारा ज़ारी एक बयान में कहा गया है कि “गेहूं को 65 दिनों के लिए, 55 दिनों के लिए चावल, 17 दिनों के लिए मटन, 1 महीने के लिए पोल्ट्री, 35 दिनों के लिए मिट्टी के तेल, 1 महीने के लिए एलपीजी, हाई-स्पीड डीजल (एचएसडी) और 28 दिनों के लिए पेट्रोल के लिए स्टॉक किया गया है।”

विभाग द्वारा ज़ारी इस बयान में कहा गया है कि कश्मीर संभाग के कुल 3697 राशन दुकानों में से 3557 राशन दुकानों को नागरिकों को राशन उपलब्ध कराने के लिए चालू किया गया है। जिसमे सब्जिया / एलपीजी / पोल्ट्री / अंडों की डिलीवरी मोबाइल वैन के जरिये सुनिश्चित की गई है।” अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के बाद जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को विभाजित किया है जो केंद्र शासित प्रदेश के रूप में गठित हुआ है। केंद्र के इस कदम के बाद पिछले एक सप्ताह से जम्मू और कश्मीर में कर्फ्यू लगा हुआ है।

शाह बोले ख़त्म होगा आतंकवाद
आज केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि धारा 370 के हटने से जम्मू और कश्मीर में आतंकवाद समाप्त हो जाएगा और घाटी के लिए विकास का एक नया मार्ग प्रशस्त होगा।

चेन्नई में एक पुस्तक लॉन्च में एक सभा को संबोधित करते हुए गृह मंत्री ने कहा, “एक सांसद के रूप में, मेरा दृढ़ विश्वास है कि अनुच्छेद 370 को बहुत पहले हटा दिया जाना चाहिए था। एक गृह मंत्री के रूप में जम्मू और कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाने के बाद परिणामों के बारे में मेरे मन में कोई भ्रम नहीं था।”