आर्थिक मंदी और जीडीपी पर बोले मनमोहन ” तीस साल में सबसे नीचे जीडीपी”

राजनीति छोड़ इस समस्या से निकले का सरकार से किया आग्रह

नई दिल्ली। देश के पूर्व प्रधानमंत्री और अर्थशास्त्री मनमोहन सिंह ने जीडीपी और आर्थिक मंदी पर सरकार की घेराबंदी की है। उन्होंने अपने द्वारा दिए गए एक बयान में कहा कि अर्थव्यवस्था की स्थिति आज गहरी चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार द्वारा “चौतरफा कुप्रबंधन” से जीडीपी में लगातार गिरावट दर्ज की गई है। दिग्गज कांग्रेसी नेता की ये टिप्पणी सरकारी आंकड़ों में आई गिरावट के दो दिन बाद आज सामने आई है। मनमोहन सिंह ने ये भी कहा कि बीते 30 वर्षों के बाद समाप्त हुई तिमाही में भारत की अर्थव्यवस्था, पिछले छह वर्षों में लगातार नीचे आते जा रही है। देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में वृद्धि चालू वित्त वर्ष (2019-20) की पहली तिमाही में 5 प्रतिशत रही, जबकि पिछली तिमाही में यह 5.8 प्रतिशत और साल 30 जून 2018 को समाप्त तिमाही में 8.0 प्रतिशत थी।

डॉ मनमोहन सिंह ने कहा, “भारत इस रास्ते को जारी रखने का जोखिम नहीं उठा सकता। इसलिए, मैं सरकार से निवेदन करता हूं कि वह प्रतिशोध की राजनीति को छोड़ दे, और सभी मानवीय आवाज़ों और सोच दिमाग तक पहुंचाए, जिससे हमारी अर्थव्यवस्था इस मानव निर्मित संकट से बाहर निकल सके।”
उन्होंने कहा, “पिछली तिमाही की सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर 5 प्रतिशत के संकेत है कि हम लंबे समय तक मंदी के बीच में है।

गौरतलब है कि डॉ मनमोहन सिंह आर्थिक सुधारों के लिए व्यापक रूप से पहचाने जाते हैं जिसकी घोषणा उन्होंने 1991 में की थी जब वह नरसिम्हा राव सरकार में वित्त मंत्री थे। लगातार पांचवीं तिमाही के लिए जीडीपी ग्रोथ फिसलने से मार्च 2013 की तिमाही के बाद आर्थिक विस्तार सबसे धीमी गति से आया, जब यह 4.3 प्रतिशत पर था।

विश्लेषकों का कहना है कि कारों की बिक्री में मंदी, बिस्कुट और लाखों की अनुमानित नौकरी में कटौती से देश की आर्थिक वृद्धि प्रभावित हुई है। निवेश को आगे बढ़ाने और विकास को पुनर्जीवित करने में सरकार ने पिछले कुछ दिनों में कई उपायों की घोषणा की है, जिनमें चार क्षेत्रों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश या विदेशी प्रत्यक्ष निवेश मानदंडों में ढील, और विदेशी निवेशकों पर उच्च कर का उलटफेर करना शामिल है।