COP-14 सम्मेलन में बोले मोदी, बंजर ज़मीन को उपजाऊ बनाएगा भारत

COP-14 में सिंगल यूज़ प्लास्टिक के उपयों को बंद करने की कहीं बात

नई दिल्ली। COP-14 कांफ्रेंस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने घोषणा करते हुए कहा कि भारत 2030 तक 21 से 26 मिलियन हेक्टेयर तक बंजर ज़मीन को उपजाऊ और किसानी के लिए बहाल करने का काम करेगा। संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन (UCCD) में COP-14 में बोलते हुए मोदी ने कहा कि 2015 और 2017 के बीच भारत के फॉरेस्ट्री और ग्रीनरी में 0.8 मिलियन हेक्टेयर की वृद्धि हुई। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा “मुझे यह बताते हुए खुशी महसूस हो रही है कि भारत लैंड रीस्टोरेशन स्ट्रेटेजी विकसित करने में सभी मित्र देशों की मदद करने के लिए तैयार है। पीएम मोदी ने ऐलान किया कि भारत आने वाले समय में बंजर जमीन को उपजाऊ बनाने की ओर कदम बढ़ा रहा है, भारत 21 मिलियन हेक्टेयर्स से लेकर 26 मिलियन हेक्टयर्स बंजर भूमि को 2030 तक उपजाऊ करेगा।”


पर्यावरण को बचाने के संदेश देने के मकसद से यह सम्मेलन संयुक्त राष्ट्र के तत्वावधान में आयोजित किया गया है। सम्मेलन में पीएम नरेन्द्र मोदी के साथ केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावडेकर और राज्य मंत्री बाबुल सुप्रीयों भी मौजूद रहे। कॉप-14 कार्यक्रम में करीब 196 देश हिस्सा ले रहे हैं। इस सम्मेलन में करीब 80 देशों के मंत्री, वैज्ञानिक और स्वयंसेवी संस्थाएं शामिल हुए हैं। देश और दुनिया में इन समस्याओं से निपटने के लिए किए जा रहे उपायों को विश्वमंच पर साझा किया जा रहा है। कॉप 14 सम्मेलन का मकसद दुनिया को बढ़ते मरूस्थलीकरण से बचाना है। काॅप 14 की मेजबानी इस बार भारत कर रहा है।

बायो फर्टिलाइज़र को दे रहे है बढ़ावा
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सम्मेलन मे कहा कि पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन के नकारात्मक असर को झेल रही है। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया को मरूस्थलीयकरण से बचाने के लिए कटिबद्ध है। इसीलिए भारत ने दो साल तक इस सम्मेलन का होस्ट बनने फैसला लिया है। पीएम मोदी ने कहा कि हम बायो फर्टिलाइजर को बढ़ावा दे रहे हैं और केमिकल फर्टिलाइजर के इस्तेमाल को कम कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि भारत ने सिंगल यूज प्लास्टिक पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया है। हमारा लक्ष्य किसानों की आमदनी दो गुना करने का है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत ने इस मसले पर तीन बड़े कार्यक्रमों का आयोजन किया है, इससे हमारी कोशिशों के बारे में दुनिया को पता लगता है।