मन की बात में बोले मोदी 2 अक्टूबर से भारत बोले “नो प्लास्टिक”

मन की बात में नरेंद्र मोदी ने गांधी जयंती की विस्तृत चर्चा

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को रेडियो कार्यक्रम मन की बात में संबोधित किया। दूसरी बार सरकार बनने के बाद मोदी का यह तीसरा कार्यक्रम है। उन्होंने कहा कि हमारा देश, इन दिनों एक तरफ वर्षा का आनंद ले रहा है, तो दूसरी तरफ, हिंदुस्तान के हर कोने में किसी ना किसी प्रकार से, उत्सव और मेलों की धूम है। दीवाली तक, सब-कुछ यही चलेगा। पिछले दिनों हम लोगों ने कई उत्सव मनाये। कल, हिन्दुस्तान में श्री कृष्ण जन्म-महोत्सव मनाया गया। मित्रता कैसी हो, तो सुदामा वाली घटना कौन भूल सकता है और युद्ध भूमि में इतनी सारी महानताओं के बावजूद भी सारथी का भार स्वीकारना।

               मोदी ने कहा आज जब हम, उत्सवों की चर्चा कर रहे हैं, तब, भारत एक और बड़े उत्सव की तैयारी में जुटा है। भारत के साथ-साथ दुनियाभर में इसकी चर्चा है। मैं बात कर रहा हूं महात्मा गाँधी की 150वीं जयन्ती की। गांधी जी ने किसानों की सेवा की जिनके साथ चम्पारण में भेद-भाव हो रहा था। उन मिल मजदूरों की सेवा की जिन्हें उचित मजदूरी नहीं मिल रही थी, गांधी जी ने ग़रीब, बेसहारा और कमजोर लोगों की सेवा को अपने जीवन का परम कर्तव्य माना।

             पीएम मोदी ने कहा कि गांधी जी ने सेवा शब्दों में नहीं – जी करके सिखायी थी। सत्य के साथ, गांधी जी का जितना अटूट नाता रहा है, सेवा के साथ भी उतना ही अनन्य अटूट नाता रहा है। महात्मा गाँधी, अनगिनत भारतीयों की तो आवाज बने ही, लेकिन, मानव मूल्य और मानव गरिमा के लिए, एक प्रकार से, वे, विश्व की आवाज बन गये थे।

नो प्लास्टिक अभियान
पीएम मोदी ने कहा – आपको याद होगा कि पिछले कुछ सालों में हम 2 अक्टूबर से पहले लगभग 2 सप्ताह तक देशभर में ‘स्वच्छता ही सेवा’ अभियान चलाते हैं। इस बार ये 11 सितम्बर से शुरू होगा। उन्होंने कहा इस बार 2 अक्टूबर को जब बापू की 150वीं जयंती मनायेंगे तो इस अवसर पर हम उन्हें न केवल खुले में शौच से मुक्त भारत समर्पित करेंगे बल्कि उस दिन पूरे देश में प्लास्टिक के खिलाफ एक नए जन-आंदोलन की नींव रखेंगे।

            उन्होंने कहा कि कई व्यापारी भाइयों-बहनों ने दुकान में एक तख्ती लगा दी है, जिस पर यह लिखा है कि ग्राहक अपना थैला साथ ले करके ही आयें। इससे पैसा भी बचेगा और पर्यावरण की रक्षा में वे अपना योगदान भी दे पायेंगे। मैं समाज के सभी वर्गों से, निवासियों से अपील करता हूं कि इस वर्ष गाँधी जयंती, एक प्रकार से हमारी इस भारत माता को प्लास्टिक कचरे से मुक्ति के रूप में मनायें। महात्मा गाँधी जयंती का दिन एक विशेष श्रमदान का उत्सव बन जाए।