निर्भया मामला : भतीजे की वज़ह से CJI ने सुनवाई से बनाई दूरी

सुनवाई के लिए प्रधान न्यायाधीश एक पीठ का करेंगे गठन

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति एस.ए. बोबडे ने निर्भया मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया। निर्भया के साथ सामूहिक दुष्कर्म करने और उसकी हत्या करने के दोषियों को मौत की सजा सुनाई गई है। दोषियों ने मामले पर समीक्षा याचिका दायर की है। प्रधान न्यायाधीश ने अपने भतीजे अर्जुन बोबडे के पीड़िता की ओर से उपस्थित होने के चलते मामले से खुद को अलग कर लिया है। मामले की समीक्षा याचिका पर सुनवाई के लिए प्रधान न्यायाधीश बुधवार को एक पीठ का गठन करेंगे।

साल 2012 में दिल्ली में 23 वर्षीय एक युवती के बलात्कार और हत्या के लिए दोषी ठहराए गए पांच पुरुषों में से एक, अक्षय सिंह ने उसकी मौत की सजा की समीक्षा की मांग की थी।

इधर महिला की मां ने कहा कि “मैं उम्मीद कर रही थी कि समीक्षा याचिका आज खारिज कर दी जाएगी, जैसा कि हमने 7 साल तक इंतजार किया है, हम एक और दिन इंतजार करेंगे। उम्मीद है कि समीक्षा याचिका कल खारिज कर दी जाएगी और उन्हें जल्द ही फांसी दी जाएगी।”

गौरतलब है कि अदालत ने पिछले साल जुलाई में इस मामले में अन्य तीन दोषियों मुकेश, 30, पवन गुप्ता, 23, और विनय शर्मा, 24, द्वारा दायर समीक्षा याचिकाओं को खारिज कर दिया था। दक्षिणी दिल्ली में चलती बस में 23 दिसंबर को 23 वर्षीय एक छात्रा से गैंगरेप कर को प्रताड़ित किया गया। उसे और उसके पुरुष मित्र को भी पीटा गया और चलती बस से बाहर फेंक दिया गया, दोनों खून से लथपथ सड़क पर पड़े थे। इस मामलें में कुल छह आरोपी है जिसमें से एक नाबालिक है। दो सप्ताह तक जिंदगी और मौत की लड़ाई लड़ने के बाद, “निर्भया” की मृत्यु हो गई। सिंगापुर के एक अस्पताल में उसकी मृत्यु हो गई थी।