गांजे की खेती को अनुमति देगी ओडिशा सरकार ?

शराब से सस्ता और आसान नशा है गांजा

भुवनेश्वर। चिकित्सा के मद्देनजर गांजे की खेती को अनुमति देने के लिए ओडिशा सरकार के आबकारी विभाग ने कल एक बैठक बुलाई है। बैठक में कई आला अफसर हिस्सा लेंगे। ज्वाइंट सेक्रेटरी एसबीके प्रधान ने एक्साइज कमिश्नर ओडिशा को संबोधित करते यह पत्र जारी किया है। 8नवंबर को जारी पत्र में कहा गया कि चिकित्सकीय उपयोग के लिए गांजे की खेती को अनुमित देने के संबंध में 19 नवंबर को बैठक रखी गई है। आप से अपेक्षा की जाती है कि इस बैठक में आवश्यक दस्तावेज और सूचनाओं के साथ उपस्थित हों। पत्र की प्रतिलिपि कई अन्य आला अफसरों को भी भेजी गई है। उल्लेखनीय है कि भारत में गांजे की खेती अवैध है। इसके बाद भी इसकी खेती होती है। अमरीका समेत कई देशों ने गांजे की खेती को वैधानिक रुप से मंजूरी दी है। भारत के कई नेता भी इसकी खेती को कानूनन मंजूरी देने की वकालत कर चुके हैं।

बता दें कि गांजा पौधे का फूल गांजे के रुप में और उसके पत्ते भांग के रुप में जाने जाते हैं। अनुसंधानकर्ताओं का कहना है कि गांजा के उपयोग के बाद किसी को अपराध में संलग्न नहीं देखा गया ह जबिक शराब पीकर अपराध के दरों में वृदिध हुई है। डाक्टरों के अनुसार शराब नुकसानदेह है जबिक गांजा का नुकसानपरक पक्ष नहीं देखा गया है जब तक कि वह अधिकाधिक न हुआ हो। समाजसेवको का मत है कि पुलिस गांजा पकड़ने में ज्यादा रुचि रखती है जबिक अवैध शराब के प्रति उदासीन रहती है। जबकि नुकसान सबसे ज्यादा शराब से हो रहा है।

छतीसगढ़ के लिए बनेगी मुसीबत
फिलहाल गांजे की खेती को अनुमति दी जाए या नहीं यह तो बैठक के बाद तय होगा। गर अनुमति मिल गई तो सीमा से सटे छत्तीसगढ़ की पुलिस के लिए आफत बन बैठेगी। अब तक यहां की पुलिस ने जो टनों गांजा पकड़ा है सब ओडिशा से यहां की सरहद पार करते पकड़े गए हैं। शराबबंदी की मांग से जूझ रही कांग्रेस सरकार के लिए गांजा भी एक चुनौती बन जाएगी।

सबसे चोखा माल ओडिशा का
गंजे की टनों टन खेप ओडिशा से ही निकल कर देशभर में सप्लाई होती है। बताया जाता है कि ओडिशा के मलकानगिरि इलाके का गांजा सबसे बेतरीन होता है। चुटकी भर गांजे के दो दम में ही सर घूमने लग जाता है। लिहाज़ा इस इलाके के गांजे की मांग पुरे देश में है खासकर पंजाब, नोएडा, पुणे, जयपुर, भोपाल, इंदौर और रायपुर समेत कई बड़े शहरों में है।

सावन महीने में बढ़ती है खपत
वैसे गांजे का उपयोग धार्मिक अनुष्ठानों में किया जाता है। शिवजी के प्रसाद के रुप में गांजा-भांग दोनों का उपयोग होता है। ओडिशा में त्रिनाथ मेला में इसे अर्पित किया जाता है और प्रसादस्वरुप लोग ग्रहण करते हैं। खासकर सावन के महीने में इसकी खपत बढ़ती देखी गई है।