पकिस्तान का अपनी ही सेना से दोगलापन…POK के जवान का नहीं उठाया शव

1999 में कारगिल युद्ध में पाकिस्तानी सैनिको के नहीं लिए थे शव

नई दिल्ली। भारतीय सेना ने पाकिस्तान के दो सैनिकों को मार गिराया है। सीज़ फायर की जवाबी कार्यवाही करते हुए भारत की ओर से ये मुहतोड़ जवाब दिया गया है। जिसके बाद पाकिस्तान का दोहरा चरित्र उजागर हुआ है। सूत्रों ने बताया कि पाकिस्तानी सैनिकों की मौत के बाद उनके सैनिको ने एक सफेद झंडा लहराया, वे अपने सहयोगियों के शव को निकालने के लिए LOC में आए थे। सफेद झंडा एक गैर-शत्रुतापूर्ण इरादे और भारतीय सेना की और से गोलीबारी रोकने के लिए एक संकेतक है।

मिली जानकारी के मुतबिक़ 10 सितंबर को एक पाकिस्तानी सैनिक सिपाही ग़ुलाम रसूल को पाकिस्तान द्वारा संघर्ष विराम का उल्लंघन करने के बाद भारतीय सेना द्वारा गोली मार दी गई थी। पाकिस्तानी पक्ष ने शव को वापस लाने के प्रयास में एक बार फिर गोलीबारी शुरू कर दी। हालांकि, एक और सैनिक इस गोलीबारी में मारा गया था। जिसके बाद पाकिस्तानी सेना ने अपनी गोलीबारी बंद कर शव वापस ले जाने के लिए सफ़ेद झंडा लहरा कर सिग्नल दिया।

कल ले गए साथी सैनिक का शव
मिली जानकारी के मुताबिक शुक्रवार को तीन-चार पाकिस्तानी सैनिकों को एक सफेद झंडा लेकर शवों की ओर जाते देखा गया। भारतीय सेना ने उन्हें शव वापस लेने की अनुमति दी गई है। भारतीय गोलीबारी में मारे गए दोनों सैनिक पाकिस्तानी पंजाब के थे। पाकिस्तानी सेना ने 30-31 जुलाई को केरन सेक्टर में भारतीय सेना द्वारा मारे गए सात सैनिकों और आतंकवादियों के शवों को निकालने की कोशिश नहीं की। सूत्रों ने कहा कि यह संभावना है कि केरन लड़ाई में मारे गए लोग पाकिस्तानी पंजाब से नहीं थे, लेकिन या तो पाकिस्तान के उत्तरी लाइट इन्फैंट्री (एनएलआई) से थे या कश्मीरी वंश के थे।

पहले भी दिखा दोहरा चरित्र
पाकिस्तान ने 1999 में कारगिल युद्ध में मारे गए अपने स्वयं के सैनिकों के शव लेने से इनकार कर दिया था और भारतीय सैनिकों ने युद्ध के दौरान बर्फीले पहाड़ियों की ऊंचाइयों में ससम्मान उनका अंतिम संस्कार किया था।