प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अटल भूजल योजना का किया शुभारंभ

अब से ‘अटल टनल’ के नाम से जाना जाएगा रोहतांग टनल : मोदी

नई दिल्ली। भारत रत्न प्राप्त अटल विहारी वाजपेयी के 95वें जयंती के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अटल भूजल योजना का शुभारंभ किया। इस योजना का उद्देश्य देश में सामुदायिक भागीदारी के जरिये भूजल प्रबंधन में सुधार लाना है। इस योजना के जरिये भूजल संरक्षण पर ध्यान दिये जाने के साथ प्रत्येक घर तक साफ पीने का पानी पहुंचाने का सरकार ने लक्ष्य रखा है। इसके साथ ही हिमाचल प्रदेश के मनाली में साढे़ दस हजार फीट की ऊंचाई पर बन रही 8.8 किलोमीटर लंबी रोहतांग टनल का नाम ‘अटल टनल’ के नाम से नामित करने की घोषणा की गई। जानकारी के मुताबिक अटल भूजल योजना जल संकट का सामना करने वाले राज्य- उत्तर प्रदेश, गुजरात, हरियाणा, कर्नाटक, मध्यप्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र में लागू होगी। जल प्रदूषण की मात्रा सहित कई अन्य मापदंडों के आधार पर उक्त राज्यों में इस योजना को लागू कराने का सरकार ने फैसला किया है। प्रधानमंत्री ने इस मौके पर स्टार्टअप्स से आग्रह किया कि वे ऐसी प्रौद्योगिकी लाएं, जिससे हमारी विभिन्न आवश्यकताओं में पानी का कम से कम इस्तेमाल सुनिश्चित हो सके। मोदी ने इसके साथ ही प्रत्येक गांव से आग्रह किया कि वे जल कार्य योजना बनाएं और जल कोष का सृजन भी करें।

केंद्र सरकार का कहना है कि किसानों को कृषि कार्य में यह अटल भूजल योजना काफी सहयोग करेगा। किसानों के आय को दुगुना करन में भी यह योजना काफी सहायक साबित होगी। सात राज्यों के 8350 गावों अटल भूजल योजना द्वारा लाभान्वित होंगे। इस योजना में पांच सालों में छह हजार करोड़ रुपये व्यय होंगे। कुल राशि की 50 फीसदी मोदी सरकार वहन करेगी जबिक बकाया 50 फीसदी विश्व बैंक से मिलेगी। वहीं, सरकार के मुताबिक ग्राम पंचायतों में जल सुरक्षा पर ध्यान दिया जाएगा। भूजल सुरक्षा के लिए लोगों के बीच जागरूकता के लिए कई कार्यक्रमों को हाथ में लिया गया है। दूसरी तरफ बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीटर पर ट्वीट कर रोहतांग सुरंग का नामकरण ‘अटल टनल’ के रूप में किये जाने की घोषणा की। उन्होंने ट्वीट कर कहा कि आज देश के लिए बहुत महत्वपूर्ण एक बड़ी परियोजना का नाम अटल जी को समर्पित किया गया है। हिमाचल प्रदेश को लद्दाख और जम्मू कश्मीर से जोड़ने वाली, मनाली को लेह से जोड़ने वाली, रोहतांग टनल, अब अटल टनल के नाम से जानी जाएगी। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती से एक दिन पहले मंगलवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने अटल जी के नाम से टनल को नामित करने को मंजूरी दी। लाहौल को मनाली से जोड़ने वाली 8.8 किलोमीटर इस सुरंग का 80 फीसदी काम पूरा हो चुका है और मई 2020 में इसका उद्धाटन होना प्रस्तावित है। गौरतलब है कि रोहतांग टनल बनने से मनाली और केलांग के बीच की दूरी करीब 46 किलोमीटर कम हो जाएगी। सूबे के सीएम जयराम ठाकुर ने टनल का नाम अटल रखने पर केंद्र सरकार का आभार जताया है। जानकारी के अनुसार, बॉर्डर रोड आर्गेनाइजेशन (बीआरओ) की देखरेख में ऑस्ट्रिया और भारत की जाइंट वेंचर स्ट्रॉबेग-एफकॉन कंपनी इसका निर्माण कर रही है। टनल के खुलने पर बर्फबारी के कारण साल के छह महीने तक दुनिया से कट जाने वाला जनजातीय जिला लाहौल स्पीति देश-प्रदेश से पूरा साल जुड़ा रहेगा। टनल के निर्माण पर लगभग चार हजार करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। शुरुआती दौर में टनल की निर्माण लागत 1400 करोड़ रुपये आंकी गई थी और साल 2014 टनल को तैयार करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था लेकिन बीच में तकनीकी कारणों के चलते निर्माण कार्य आगे बढ़ता गया।

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