राफेल पर बोले राजनाथ – धमकाने के लिए नहीं अपनी शक्ति बढ़ाने ख़रीदा राफ़ेल

राजनाथ सिंह राफेल जेट पर ली सॉर्टी, कहा "स्मूथ और कंफर्टेबल है विमान"

नई दिल्ली। भारत किसी भी देश को धमकाने के लिए हथियारों की खरीद नहीं करता है, लेकिन अपनी रक्षा क्षमताओं को बढ़ाने के लिए हम हमेशा तैयार रहते है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने राफेल लड़ाकू जेट में अपनी लगभग 25 मिनट की उड़ान के बाद ये बयान दिया है। इस उड़ान को उन्होंने बहुत आरामदायक और स्मूथ बताया है। राजनाथ सिंह ने फ्रांस के मेरिग्नैक हवाई अड्डे पर राफ़ेल जेट की बतौर शस्त्र पूजा की जिसके बाद सवारी के लिए लड़ाकू विमान को उड़ाया गया है। राजनाथ ने कहा कि ये विमान भारतीय वायु सेना की लड़ाकू क्षमता को बड़े पैमाने पर बढ़ाएगा। उन्होंने आगे कहा कि हम किसी भी देश को धमकाने के लिए नहीं बल्कि अपनी क्षमताओं को बढ़ाने और अपनी सुरक्षा को मजबूत करने के लिए हथियारों और अन्य रक्षा उपकरणों की खरीद नहीं करते हैं। राफेल जेट के अधिग्रहण का श्रेय पीएम नरेंद्र मोदी को जाना चाहिए। उनकी निर्णायकता ने हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा को बहुत लाभ पहुंचाया है।

राफेल में अपनी उड़ान को एक यादगार बताते हुए सिंह ने कहा, “मैंने कभी नहीं सोचा था कि मुझे सुपरसोनिक गति से उड़ाया जाएगा। एक बहुत ही आरामदायक और स्मूथ उड़ान, जिसके दौरान मैं निरीक्षण करने में सक्षम था। जेट की कई क्षमताएं, इसके एयर-टू-एयर और एयर-टू-ग्राउंड युद्धक क्षमता बेहतरीन है। सिंह ने कहा मैं हर साल लखनऊ में शस्त्र पूजा करता हूं और आज मैंने फ्रांस में पूजा के लिए राफेल को शस्त्र के रूप में लिया है।

भारत द्वारा अधिग्रहित 36 जेट विमानों की डिलीवरी के लिए टाइमलाइन देते हुए राजनाथ ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि फरवरी 2021 तक पहले 18 विमान वितरित किए जाएंगे, शेष अप्रैल-मई 2022 तक विमान पहुचेंगी। मंत्री के रूप में देख रहे वायु सेना के उप प्रमुख, एयर मार्शल हरजीत सिंह अरोड़ा ने राफेल विमान में एक सॉर्टी में उड़ान भरी, कहा कि IAF के लिए नव-अधिग्रहित राफेल मुकाबला भारत की हवा में एक महत्वपूर्ण वृद्धि को चिह्नित करेगा। एक बार वे पंजाब के अंबाला और पश्चिम बंगाल के हासिमारा में तैनात हैं।

एयर मार्शल चीफ़ मार्शल अरोड़ा ने कहा “यह आज एक ऐतिहासिक क्षण है, जो भारत की सटीक हथियार क्षमता रक्षा प्रणाली में एक महत्वपूर्ण वृद्धि का प्रतीक है, जिसमें राफेल की मिसाइल क्षमता सबसे महत्वपूर्ण है। यह भारत की हवाई रक्षा के लिए अब तक का सबसे शक्तिशाली संसाधन शामिल होगा।”