Rath Yatra : इनके घर में बनता महाप्रभु का वस्त्र

महाप्रभु की सेवा में कई पीढ़ियों से जुटे है ये परिवार

पुरी। रथ यात्रा शुरू होने में बस एक दिन शेष हैं, दुनिया भर से लाखों लोग पुरी में इस महा उत्सव के लिए तैयारी कर रहे है। इस विशेष अवसर पर, पवित्र त्रिमूर्ति मौसी मां के मंदिर में एक वार्षिक भोज होगा। कुछ परिवार ऐसे हैं जिन्होंने भगवान जगन्नाथ के प्रति प्रेम और भक्ति के सही अर्थ को परिभाषित किया है। और केवल उनके समर्पित प्रयासों के कारण, रथ यात्रा उत्सव के सौंदर्य मूल्य में वृद्धि हुई है।

                       ऐसा ही एक परिवार राजकिशोर नायक का है, जो रथ यात्रा के दौरान तीनों रथों पर सजावट के लिए थर्मोकोल से बने सुंदर कृत्रिम फूल तैयार करते रहे हैं। जानकारी के अनुसार राज किशोर के परिवार के सदस्य, अक्षय तृतीया के दिन से फूलों की डिजाइनिंग की तैयारी शुरू करते है। और महाप्रभु के रथयात्रा की शुरुवात से पहले तक अपने सभी कार्यों को पूरा करते हैं।

        नेत्र उत्सव के दिन, राज किशोर खुद तीनों रथों को सीबाती और कदंब के आकार में बनाए गए कई फूलों से सजाते हैं। साल 2003 में तीनों रथों में सजावट की अनुमति मिलने के बाद, राजकिशोर का परिवार पूरी ईमानदारी से इस जिम्मेदारी को निभा रहा है। उन्होंने कहा कि “हमें लगता है कि हम परमेश्वर की सेवा के लिए खुद को समर्पित कर चुके हैं। हम अपनी अंतिम सांस तक भगवान जगन्नाथ की सेवा करते रहेंगे।”
इसी तरह, एक और परिवार है जो खुद को भगवान जगन्नाथ के सबसे खूबसूरत श्रंगार में से एक, खांडुआ पाटा (पवित्र त्रिमूर्ति द्वारा पहना जाने वाला विशेष कपड़ा) बुनाई करता है। कटक में अथागढ़ क्षेत्र के निवासी त्रिलोचन दास के परिवार ने पीढ़ियों से महाप्रभु के लिए विशेष कपड़े पहनाने का गौरव प्राप्त किया है।

         स्नाना यात्रा से अनबसरा, घोसा यात्रा से नीलाद्री बिज तक, त्रिलोचन का परिवार हर विशेष अवसर पर महाप्रभु के साथ देवी सुभद्रा और भाई बलभद्र को खण्डुआ पाटा अर्पित करते है।

त्रिलोचन ने कहा, “भगवान जगन्नाथ के लिए खंडुआ डिजाइन करना हमारे जीवन का हिस्सा बन गया है और जहाँ तक मुझे याद है, मेरे पिता ऐसा करते थे, और अब मैं अपने उत्तराधिकारी को भी इसे लेने के लिए प्रेरित कर रहा हूं। ईश्वर की सेवा मेरे लिए महत्वपूर्ण कर्तव्य।”