जम्मू-कश्मीर में पाबंदियों की सप्ताह भर के अंदर समीक्षा की जाए : सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रशासित प्रदेश जम्मू एवं कश्मीर के प्रशासन को शुक्रवार को निर्देश दिया है कि वह एक सप्ताह के अंदर सभी पाबंदियों की समीक्षा करें और उसे सार्वजनिक रूप से प्रकाशित करे, ताकि लोग उसे अदालत में उठा सकें। घाटी में अपने कदमों के पक्ष समर्थन प्राप्त करने की कोशिश में जुटी केंद्र सरकार को कोर्ट के इस आदेश से झटका लगा है।

इसके साथ ही कोर्ट ने इंटरनेट सेवा पर लगाए गए प्रतिबंध को संविधान के खिलाफ बताया। न्यायाधीश एन. वी. रमना की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा, “कोर्ट (जम्मू एवं कश्मीर में प्रतिबंधों के संबंध में) राजनीतिक औचित्य में नहीं जाएगी।”

कोर्ट ने कहा कि उसकी सीमा नागरिकों की सुरक्षा और उनकी स्वतंत्रता के बीच संतुलन बिठाने तक है, जैसा कि इस मामले में उनकी सुरक्षा और स्वतंत्रता के बीच टकराव की स्थिति है।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्देश में इस बात का जिक्र किया कि उपकरण के तौर पर इंटरनेट का इस्तेमाल संवैधानिक अधिकार है। यह अधिकार उन्हें बोलने और अभिव्यक्ति की आजादी के तहत मिला है और साथ ही यह लोगों को उनके पेशे में आगे बढ़ने में मदद करता है।

वहीं सीआरपीसी की धारा 144 पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इसका इस्तेमाल स्वतंत्रता पर लगाम लगाने के लिए नहीं किया जा सकता है और इसका इस्तेमाल वहीं किया जा सकता है, जहां हिसा और सार्वजनिक सुरक्षा पर खतरे की आशंका हो।

संबंधित पोस्ट

सीएए, एनपीआर पर आदेश पारित करने से सुप्रीम कोर्ट का इंकार

इलेक्टोरल बांड स्कीम पर तत्काल रोक से सुप्रीम कोर्ट का इनकार

मुशर्रफ की मुश्किलें बढ़ीं, मौत की सजा के खिलाफ सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट का इनकार

कलबुर्गी हत्या मामले की सुप्रीम कोर्ट ने बंद करायी निगरानी

राजद्रोह मामले में सुप्रीम कोर्ट पहुंचे मुशर्रफ

अनुच्छेद 370 को रद्द करना ऐतिहासिक कदम : सेना प्रमुख

गिरफ्तार डीएसपी देविंदर सिंह को बर्खास्त करने की सिफारिश

एससी ने निर्भया के दोषियों की क्यूरेटिव पिटिशन को निराधार बताया, खारिज

जम्मू-कश्मीर में हिमस्खलन से 5 लोगों की मौत

वाडिया ने रतन टाटा के खिलाफ अवमानना का मामला लिया वापस

मिस्त्री को झटका, सुप्रीम कोर्ट ने एनसीएलएटी के आदेश पर लगाई रोक

सुप्रीम कोर्ट हिंसा रुकने के बाद ही सीएए की वैधता तय करेगा