खाली कराया गया शाहीन बाग, मौके पर भारी पुलिस बल तैनात

टेंट हटाया गया, ड्रोन से रखी जा रही निगरानी

नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस ने शाहीन बाग में प्रदर्शन स्थल को खाली करवा दिया है। शाहीन बाग में फिलहाल हालात सामान्य हैं लेकिन मौके पर भारी पुलिस बल तैनात हैं। इससे पहले मंगलवार सुबह तीन महीने से भी ज्यादा समय से शाहीन बाग में मौजूद सभी लोगों को हटाया गया है। इसके अलावा वहां लगे टेंट भी उखाड़ दिए गए हैं। इसके लिए जेसीबी का इस्तेमाल किया गया। यहां पर ड्रोन से भी निगरानी रखी जा रही है।

पुलिस ने बताया कि शाहीन बाग में प्रदर्शनकारियों से कोरोना के कारण धरनास्थल से बाहर निकलने का अनुरोध किया गया था, लेकिन इस पर कोई अमल न होने पर पुलिस ने जगह को खाली कराने का कदम उठाया। हालांकि, लॉकडाउन के चलते प्रदर्शन स्थल पर कम लोग ही पहुंच रहे थे। जनता कर्फ्यू के दिन यहां पर सिर्फ तीन महिलाएं देखी गईं थीं। तीन महीने से भी ज्यादा वक्त के बाद इस रूट को खाली करवाया जा सका है।

दक्षिण-पूर्वी दिल्ली के डीसीपी आरपी मीणा ने बताया कि शाहीन बाग में विरोध-प्रदर्शन कर रहे लोगों से वहां से हटने का अनुरोध किया गया था, लेकिन वे नहीं माने। इसके बाद गैरकानूनी तरीके से इकट्ठा होने के कानून की अवहेलना करने के मामले में कार्रवाई की गई।

मीणा के मुताबिक प्रदर्शन स्थल को क्लियर कर दिया गया है और कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में भी लिया गया है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए मौके पर बड़ी तदाद में पुलिस के जवानों को तैनात किया गया है।

गौरतलब है कि भारत को रोकने के लिए दिल्ली और केंद्र सरकार एहतियातन हर कदम उठा रही है। दिल्ली में कर्फ्यू जैसे हालात हैं ऐसे में जो लोग नियमों का पालन नहीं कर रहे उनके खिलाफ पुलिस कार्रवाई कर रही है।

बता बता दें कि दिल्ली के साइन बाग में कई महीनों से नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में प्रदर्शन हो रहा था कुछ प्रदर्शनकारी कोरोना के मध्य दिल्ली में लगाए गए धारा 144 को भी मानने से इंकार कर रहे थे। ये लोग केंद्र सरकार के नागरिकता संशोधन कानून का विरोध कर रहे थे, जिसको केंद्र सरकार ने संसद के दोनों सदनों से पारित कर कानून बनाया था।

इस कानून के तहत बांग्लादेश अफगानिस्तान, पाकिस्तान से आये हिंदू सिख बौद्ध, जैन और ईसाई धर्म के प्रवासियों के लिए नागरिकता के नियम को आसान बनाया गया है। केन्द्र सरकार ने इस कानून को बार बार सफाई दी है कि यह कानून नागरिकता देने के लिये है न कि लेने के लिये।

(आईएएनएस)

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