सुप्रीम कोर्ट ने कहा, मानसिक बीमारी के लिए बीमा कवर क्यों नहीं

हर गुजरते दिन के साथ स्थिति खराब हो रही

नई दिल्ली। बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत को लेकर छिड़ी बहस के बीच सुप्रीम कोर्ट ने दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए मंगलवार को केंद्र और बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (आीआरडीए) को नोटिस जारी किया।

याचिका में मानसिक बीमारी के उपचार के लिए चिकित्सा बीमा का विस्तार करने के लिए सभी बीमा कंपनियों को निर्देश देने की मांग की गई थी। माना जा रहा है कि 14 जून को आत्महत्या करने वाले सुशांत अवसाद से जूझ रहे थे।

इसके अलावा एक अन्य मामले मे  देश में कोविड-19 मामलों में तेजी से वृद्धि के मद्देनजर सुप्रीम कोर्ट ने  कहा कि देश में स्थिति केवल बदतर होती जा रही है और यह कहीं से बेहतर नहीं हो रही है

जस्टिस रोहिंटन फली नरीमन, नवीन सिन्हा और बी.आर. गवई की पीठ ने एक नोटिस जारी किया और केंद्र और आईआरडीए से जवाब मांगा।

अधिवक्ता गौरव कुमार बंसल द्वारा दायर जनहित याचिका में तर्क दिया गया है कि अगस्त 2018 में आईआरडीए के आदेश के बाद भी मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम 2017 की धारा 21 के बावजूद कोई भी बीमा कंपनी इसका अनुपालन नहीं कर रही है।

याचिकाकर्ता ने शीर्ष अदालत से आग्रह किया है कि वह मानसिक बीमारी के इलाज के लिए चिकित्सा बीमा का विस्तार करने के लिए केंद्र, आईआरडीए को सभी बीमा कंपनियों को निर्देश जारी करने का आदेश दे।

जनहित याचिका कानून के तहत मानसिक बीमारी की परिभाषा पर निर्भर करती है।

पैरोल या अंतरिम जमानत देने समिति बनाए

। वहीं देश में कोविड-19 मामलों में तेजी से वृद्धि के मद्देनजर सुप्रीम कोर्ट ने  कहा कि देश में स्थिति केवल बदतर होती जा रही है और यह कहीं से बेहतर नहीं हो रही हैन्यायमूर्ति रोहिंटन नरीमन की अध्यक्षता वाली न्यायमूर्ति नवीन सिन्हा और न्यायमूर्ति बी. आर. गवई की पीठ ने कहा कि देश में कोविड -19 को लेकर स्थिति बिगड़ रही है। पीठ ने यह टिप्पणी पंजाब के एक व्यवसायी जगजीत सिंह चहल की पैरोल से जुड़े एक मामले को निपटाने के दौरान की, जो जगदीश भोला ड्रग मामले में आरोपी है।

पीठ ने कहा कि किसी को भीड़भाड़ वाली जेल में वापस भेजने का कोई मतलब नहीं है, जब वह पैरोल पर बाहर हो सकता है। शीर्ष अदालत ने चहल को हाईकोर्ट में उसकी अपील विचाराधीन रहने तक पैरोल दे दी।

शीर्ष अदालत ने 23 मार्च को सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को सात साल तक की जेल की सजा वाले अपराधों से संबंधित कैदियों और अपराधियों को पैरोल या अंतरिम जमानत देने के लिए एक उच्चस्तरीय समिति गठित करने का निर्देश दिया था। निर्देश जेलों में भीड़ को कम करने के मद्देनजर जारी किया गया था।

(आईएएनएस)

 

 

 

 

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