चंद्रबाबू के मुलाकाती दौर से निकले ये सियासी मायनें

अगर ये हुए सियासी आंकड़ें तो राहुल नहीं बनेंगे प्रधानमंत्री

नई दिल्ली। सीपीएम महासचिव सीताराम येचुरी ने रविवार को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री और तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) के अध्यक्ष एन चंद्रबाबू नायडू से मुलाकात की। इस मुलाकात के दौर को केंद्र में महागठबंधन की सरकार बनाने की दिशा में एक प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। हालाँकि ये मौका महागठबंधन को तभी मिल पाएगा जब भाजपा की सत्ता को बनाए रखने के लिए संसद में पर्याप्त संख्या बल में सांसद नहीं पहुंच पाते है।

                       टीडीपी प्रमुख एन चंद्रबाबू नायडू ने शनिवार को भाजपा का विरोध करने वाले दलों के साथ चर्चा की थी। उन्होंने दिल्ली में राहुल गांधी, लखनऊ में समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव, और बहुजन समाज पार्टी सुप्रीमो मायावती सहित कई दिग्गज नेताओं से मुलाकात की है। नायडू ने एनसीपी प्रमुख शरद पवार, सीपीआई नेता सुधाकर रेड्डी और जनता दल के नेता शरद यादव से भी मुलाकात की है। उन्होंने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से मुलाकात की थी। नायडू सहित किसी भी नेता ने बैठकों के बाद मीडिया से बात नहीं की। हालांकि, एक टेलीविजन साक्षात्कार में, टीडीपी प्रमुख ने विश्वास व्यक्त किया कि भाजपा बहुमत से कम हो जाएगी और सरकार बनाने में असमर्थ होगी।

ताकि बनी रहे सरकार
अगर राजनीतिक पंडितों की मानें तो चंद्रबाबू नायडू चुनावी नतीजों से पहले भाजपा विरोधी दलों के नेताओं से इस लिहाज से मुलाकात कर रहे हैं कि गठबंधन की सरकार बनने पर 1990 और 1996 का फार्मूला रिपीट ना हो। इस फार्मूले के तहत सरकार में सबसे बड़ी पार्टी रही कांग्रेस बाहर हो गई थी, जबकि गठजोड़ की सरकार सत्ता में थी। इसका नतीजा सरकार गिरने के साथ सभी के सामने आया। लिहाजा सभी विपक्षी दलों को साथ में रहकर भाजपा को सरकार बनाने से रोकने के बीच के नायडू यह पूरी कसरत कर रहे हैं।

इन कयासों से बढ़ रही हलचल
सूत्रों की अगर मानें तो पूरे देश में एनडीए को 200 सीटों के अंदर रोकने का प्रयास महागठबंधन ने किया है। वहीं सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी कांग्रेस को भी तकरीबन 125 से 130 सीटों के आसपास मिलने का अनुमान महागठबंधन लगा रही है। लिहाजा इन अनुमानों और कयासों के बीच सरकार बनाने का माद्दा रखने वाला महागठबंधन अपना प्रधानमंत्री भी चाहता है, लेकिन कांग्रेस प्रधानमंत्री का पद लेने प्रबल दावेदार है ऐसे में ये परेशानी भी गठबंधन के सामने खड़ी हो सकती है।

तो राहुल नहीं बनेगे प्रधानमंत्री
कांग्रेस के दिग्गज नेताओं से जुड़े विश्वसनीय सूत्रों की अगर मानें तो अगर कांग्रेस 125 सीटों के अंदर सीमट जाती है तो ऐसे में राहुल गांधी खुद प्रधानमंत्री नहीं बनेंगे। संभवत राहुल इस सीट पर किसी दलित नेता को बिठा कर अपना दलित प्रेम जग-जाहिर करेंगे। इसके साथ ही राहुल अपने अगले चुनाव के लिए जबरदस्त सियासी पैतरों के साथ अपना मैदान तैयार करेंगे।

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