उन्नाव केस : योगी बोले, फास्ट ट्रैक कोर्ट से सजा, अखिलेश ने माँगा इस्तीफा

बहुजन समाज पार्टी सुप्रीमों मायावती बोली "समुचित न्याय दिलाए सरकार"

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उन्नाव दुष्कर्म पीड़िता की मौत पर शनिवार को दु:ख व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि हम इस मामले को फास्ट ट्रैक कोर्ट में ले जाकर आरोपियों को जल्द से जल्द कड़ी सजा दिलाने का प्रयास करेंगे। मुख्यमंत्री योगी ने जारी एक बयान में कहा कि घटना बहुत दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि सभी आरोपी गिरफ्तार किए जा चुके हैं। पीड़िता की मौत पर परिवार के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करते हुए योगी ने कहा कि हम इस मामले को फास्ट ट्रैक कोर्ट में ले जाकर आरोपियों को जल्द से जल्द कड़ी सजा दिलाने का प्रयास करेंगे।

सीएम योगी के इस बयान से पहले समाजवादी पार्टी के नेता और यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव विधानसभा के बाहर धरने पर बैठ गए है। उन्होंने इस मामलें पर योगी सर्कार को घेरते हुए कहा “यह एक अत्यंत निंदनीय घटना है उत्तर प्रदेश के लिए यह एक काला दिन है।

उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार के रहते यूपी में इस तरह की पहली घटना नहीं है, सीएम ने इसी सदन में कहा था, ‘अपराधियों को ठोक दियो जायगा’ लेकिन वे एक बेटी की जान नहीं बचा सकते। अखिलेश ने कहा कि “जब तक उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री, राज्य के गृह सचिव और डीजीपी इस्तीफा नहीं देते, तब तक न्याय नहीं होगा। कल हम उन्नाव बलात्कार मामले को लेकर राज्य के सभी जिलों में एक शोभा सभा करेंगे।”

मायावती बोली- न्याय दिलाए सरकार
इधर (बसपा) की मुखिया मायावती ने दुख जताते हुए मांग की है कि उत्तर प्रदेश सरकार पीड़ित परिवार को समुचित न्याय दिलाने हेतु शीघ्र ही विशेष पहल करे। उन्होंने ट्वीट किया,”जिस उन्नाव रेप पीड़िता को जलाकर मारने की कोशिश की गई,उसकी कल रात दिल्ली में हुई दर्दनाक मौत अति-कष्टदायक। इस दुख की घड़ी में बीएसपी पीड़ित परिवार के साथ है। यूपी सरकार पीड़ित परिवार को समुचित न्याय दिलाने हेतु शीघ्र ही विशेष पहल करे, यही इंसाफ का तकाजा व जनता की मांग है।”

ज्ञात हो कि 90 प्रतिशत से भी ज्यादा जल चुकी पीड़िता ने आखिरी वक्त तक हार नहीं मानी थी। गुरुवार देर शाम लखनऊ से एयरलिफ्ट कर दिल्ली ले जाई गई पीड़िता रात नौ बजे तक होश में थी। डॉक्टरों ने उसे होश में बनाए रखने की पूरी कोशिश की, उसे वेंटिलेटर पर रखा, लेकिन वह बच न सकी। सफदरजंग अस्पताल में बर्न और प्लास्टिक विभाग के अध्यक्ष डॉ. शलभ कुमार ने बताया, “इस तरह की घटनाओं में शुरुआत के 72 घंटे काफी अहम होते हैं। अगर तीन दिन ठीक से निकल जाते तो काफी हद तक पीड़िता को बचाया जा सकता था। हालांकि उन्नाव की बेटी 44 घंटे तक ही संघर्ष कर सकी।”

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