बड़े अफसर को भाई कहा तो खैर नहीं…

ओडिशा सरकार का फरमान

भुवनेश्वर | राजनीति में पैर छूने और भैया कहकर संबोधित करने की परंपरा चली आ रही है। नेता के चेले उनका पांव छूकर आशीर्वाद लेते हैं, भैया कहना आम है। भैया कहकर अपनी निकटता और संबंध को प्रदर्शित करते हैं। कोई नेता चुनाव लड़ रहा हो तो प्रचार में जुटा उसका बेटा और यहां तक कि उसकी पत्नी भी नारा लगाते दिख जाएगी- ….फलां नेता कैसा हो… भैया जैसा हो। कई कंपनियों के दफ्तरों में भी भैया संस्कृति जारी है। मीडिया के दफ्तर भी इससे अछूते नहीं हैं। पर जब अफसरों पर यह रोग लग जाये तो ….। भाई (भैया ) का यह रोग ओडिशा के नौकरशाहों में संक्रमित हो गया लिहाजा सरकार को चेतावनी देनी पड़ी कि वे यदि दफ्तर में या काम की जगह पर अपने अफसर को भाई कहकर संबोधित करते हैं तो अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। , “ऐसा करना न केवल ओडिशा सरकार सेवक आचरण नियम 1959 का उल्लंघन है, बल्कि यह अवज्ञा का भी प्रतीक है।”

ओडिशा के पशुपालन और पशु निदेशक रत्नाकर राउत ने एक सर्कुलर में कहा, “इस निदेशालय के जूनियर स्तर के अधिकारी और फील्ड ऑफिस उच्च अधिकारी की मौजूदगी में भी अपने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ कार्यस्थल पर आधिकारिक सदाचार का पालन नहीं कर रहे हैं।”

शनिवार को जारी सर्कुलर में कहा गया है, “उदहारण के तौर पर तकनीकी अधिकारी अपने वरिष्ठ अधिकारियों एसडीवीओ/सीडीवीओ और ज्वाइंट डायरेक्टर लेवल-प्रथम को ‘भाई’ कह रहे हैं।” निदेशक ने कहा, “व्यक्तिगत संबंध चाहे जो भी हों, लेकिन काम के समय या कार्यालय परिसर में किसी भी सरकारी कर्मचारी की ओर से इस तरह से अपने उच्च अधिकारी को संबोधित करना उचित नहीं है। चिकित्सा निदेशालय ने जूनियर स्तर के अधिकारियों को चेताते हुए कहा कि यदि वे अपने वरिष्ठ अधिकारियों को ‘भाई’ संबोधित करते हुए पाए जाते हैं, तो उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।