क्यों है तिहाड़ जेल की पहली पसंद ‘पवन जल्लाद’

उप्र जेल महानिदेशालय को लिखा पत्र

नई दिल्ली। किसी इंसान को मौत देनी हो तो यहां पसंद या नापसंद की बात तो रहती नहीं है। भाई, एक इंसान को सजा-ए-मौत ही तो देनी है। लेकिन बात जब यहां जेल प्रशासन की सुविधाओं और असुविधाओं की हो तो, जल्लाद भी यहां चुनकर लिया जाता है।

जी हां, हम बात कर रहे हैं निर्भया हत्याकांड के चारों हत्यारों को सजा-ए-मौत देने वाले जल्लाद की। तिहाड़ जेल महानिदेशालय ने 22 जनवरी को निर्भया के हत्यारों को फांसी दिलाने के लिए मेरठ के पवन जल्लाद की मांग की है।

आखिर पवन जल्लाद ही क्यों?

दरअसल, पवन का जल्लादों वाला काम पुश्तैनी है। वह काफी सालों से यही काम करता आया है। उसने पुरखों के साथ फांसी देने-दिलवाने का काम सीखा है। इतना ही नहीं, पवन शरीर से मजबूत है। फांसी देते वक्त पवन जल्लाद से किसी भूल की गुंजाइश न के बराबर होगी।

फांसी देने के लिए जल्लाद की आंखों की रोशनी भी दुरुस्त होनी चाहिए, जो पवन जल्लाद में है।

जल्लाद की सुरक्षा जेल प्रशासन की जिम्मेदारी

दोषी को फांसी देने वाले जल्लाद की सुरक्षा जेल प्रशासन की जिम्मेदारी होती है। उसे उसके घर से तिहाड़ जेल तक लाने-ले जाने का इंतजाम बेहद गोपनीय और जोखिम भरा रहता है। पवन उत्तप्रदेश के मेरठ जिले के इस इलाके में रहता है, वह दिल्ली सीमा से मात्र 50-60 किलोमीटर की दूरी पर है।

चूंकि तिहाड़ जेल और मेरठ के बीच की दूरी बेहद कम है। तो जाहिर है पवन को लाने और जाने का वक्त भी कम लगेगा। साथ ही तिहाड़ जेल प्रशासन को जोखिम ज्यादा नहीं उठाना पड़ेगा।

इतना ही नहीं, यदि उत्तर प्रदेश पुलिस पवन को सुरक्षा नहीं दे पाती है तो उसे दिल्ली पुलिस से भी तिहाड़ जेल प्रशासन सुरक्षा मुहैया करा सकता है।

जल्लाद के लिए उप्र जेल महानिदेशालय को पत्र

‘डेथ-वारंट’ हासिल होते ही, निर्धारित फांसी प्रक्रिया को अंजाम तक पहुंचाने के क्रम में बुधवार को तिहाड़ जेल महानिदेशालय ने उत्तर प्रदेश जेल महानिदेशालय को दुबारा एक चिट्ठी लिखी है।

चिट्ठी के जरिये यूपी जेल महानिदेशालय से निर्भया के हत्यारों की फांसी के लिए प्रशिक्षित जल्लाद को प्राथमिकता पर तलाशने का आग्रह किया गया है। इस गोपनीय पत्र में तिहाड़ जेल प्रशासन ने निर्भया के दोषियों को पवन जल्लाद से ही फांसी दिलवाने के लिए इच्छा जाहिर की है।

अब से करीब एक 20 दिन पहले भी तिहाड़ जेल महानिदेशालय यूपी जेल डिपार्टमेंट से इसी तरह का आग्रह किया था। अब चूंकि डेथ वारंट जेल महानिदेशालय के पास मौजूद है। लिहाजा, ऐसे में बुधवार को दुबारा लिखी गई नई चिट्ठी में इस डेथ-वारंट का भी हवाला दिया गया है।

दिल्ली जेल महानिदेशक संदीप गोयल ने बताया है कि अदालत से हासिल 6 पेज का जो आदेश मुजरिमों को दिया गया है, उसमें भी उनके डेथ वारंट से संबंधित जिक्र किया गया है।