कर्नाटक में येदियुरप्पा ने चलाई फिरकी,कांग्रेस-जेडीएस परास्त

भाजपा को मिली पूर्ण बहुमत

बेंगलुरू,(आईएएनएस) | कनार्टक विधानसभा में अब सभी दलों का नाटक खत्म हो गया। आज आये उपचुनाव के नतीजों में भाजपा ने विधानसभा में पूर्ण बहुमत हासील कर लिया है। ऐसे में माना जा रहा है कि अब एस येदियुरप्पा के नेतृत्व वाली सरकार के लिए राज्य के15 विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव में भाजपा ने सोमवार को 12 सीटों पर विजयी हासिल कर अपना पक्ष मजबूत कर लिया है। भाजपा ने कर्नाटक में कांग्रेस और अन्य दलों का सूपड़ा ही साफ़ कर दिया है। उपचुनाव में महज 2 सीट से ही कांग्रेस को संतुष्ट होना पड़ा। जबकि होसकोटे सीट पर निर्दलीय प्रत्याशी ने जीत दर्ज की है। वहीँ जनता दल (एस) का खाता भी नहीं खुल पाया है।

भाजपा बानी पूर्ण बहुमत की सरकार
एच डी कुमारस्वामी के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार के पतन के बाद येदियुरप्पा ने 25 जुलाई 2019 को राजनितिक नाटक को खत्म किया था। इसके बाद दूसरे दिन येदि ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। इन उपचुनावों में येदियुरप्पा को अपनी सरकार को बचाने के लिए 6 सीटों की आवश्यकता थी। भाजपा की बड़ी सफलता ने उसे मजबूत कर दिया। 222 सदस्यीय कर्नाटक विधानसभा में भाजपा के पास 117 सीटें हो गई। ऐसे में वो पूर्ण बहुमत हासिल का लिया है।

सिद्धारमैया ने दिया विधायक दल के नेता पद से इस्तीफा
कर्नाटक उपचुनाव में शर्मनाक हार के बाद सिद्धारमैया ने सोमवार को राज्य विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को अपना इस्तीफा भेज दिया है। उन्होंने कहा है कि जनता के फैसले का सम्मान किया जाना चाहिए। सिद्धारमैया ने अपने त्याग-पत्र में लिखा, “ईमानदारी के साथ किए अपने प्रयासों के बावजूद उपचुनाव में संतोषजनक परिणाम नहीं दे पाने के लिए मैं खेद व्यक्त करता हूं।” उन्होंने कहा कि कांग्रेस विधायक दल के नेता पद को छोड़ना उनकी नैतिक जिम्मेदारी है।15 विधानसभा सीटों के लिए हुए उपचुनाव में कांग्रेस केवल दो सीटें जीत सकी।

 

जद(एस) का सूपड़ा साफ़
कर्नाटक की क्षेत्रीय पार्टी जनता दल(सेकुलर) ने राज्य में हुए विधानसभा उप चुनाव में काफी खराब प्रदर्शन रहा। पार्टी ने पांच दिसंबर को हुए उपचुनाव में कुल 12 सीटों पर चुनाव लड़ा था, जिसमें उसे एक भी सीट नहीं जीत पाई। गठबंधन के अपने पूर्व साथी कांग्रेस से अलग होकर, जद(एस) ने खुद के दम पर एक दर्जन सीट पर सत्तारूढ़ भाजपा और कांग्रेस के खिलाफ चुनाव लड़ा था। उसी तरह से अपने पूर्व साथी कांग्रेस की तरह ही, जद(एस) अप्रैल-मई में हुए आम चुनाव में केवल एक सीट-हासन पर जीत दर्ज कर पाई थी। पार्टी ने कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था और अपने सात उम्मीदवार ख़ड़े किए थे। जद(एस) के महासचिव रमेश बाबू ने कहा, “हम विनम्रता के साथ लोगों के जनादेश को स्वीकार करते हैं और उपचुनाव के नतीजे के बाद हम राज्य में पार्टी की स्थिति की समीक्षा करेंगे।”

ये था कर्नाटक का नाटक
मई 2018 में हुए विधानसभा चुनाव में 36 सीटें जीतने वाले जद(एस) कांग्रेस से गठबंधन कर 12 वर्ष बाद सत्ता पर काबिज हुई थी और एच.डी.कुमारस्वामी दूसरी बार राज्य के मुख्यमंत्री बने थे।कांग्रेस के 14 और जद(एस) के तीन बागी विधायकों के जुलाई मध्य में इस्तीफे की वजह से 14 माह पुरानी सरकार 23 जुलाई को गिर गई थी। कुमारस्वामी 225 सदस्यीय विधानसभा में विश्वास मत हासिल नहीं कर सके थे। कांग्रेस और जेडीएस के 17 विधायकों ने तत्कालीन मुख्यमंत्री कुमारस्वामी के फ्लोर टेस्ट से पहले इस्तीफा दे दिया था। तब के स्पीकर केआर रमेश कुमार ने इस्तीफा स्वीकार न करते हुए सभी विधायकों को अयोग्य घोषित कर दिया था, इसलिए 15 सीटों पर उपचुनाव हुए।