केन्द्रीय नियामक का प्रस्ताव सार्थक एवं सकारात्मक पहल- डॉ. चौधरी

वरिष्ठ प्राध्यापक डा.लखन चौधरी के विचार

वेब डेस्क। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत सभी राज्य शिक्षा बोर्डों के लिए केन्द्रीय नियामक का प्रस्ताव बहुत ही सार्थक एवं सकारात्मक पहल है। एक महत्वपूर्ण कदम है। यह एक स्वागत योग्य निर्णय है। इससे जहां एक ओर देश के सभी राज्य बोर्डों के मध्य समन्वय एवं एकरूपता स्थापित हो सकेगी, जिससे विद्यार्थियों के लिए दुसरे राज्यों में या केन्द्रीय संस्थानो में पढ़ने की असुविधा दूर होगी; वहीं दूसरी ओर राज्यों की शिक्षा व्यवस्था में (विशेषकर हिन्दी भाषी राज्यों की) गुणात्मक सुधार आयेगा। आज छत्तीसगढ़ सहित सभी हिन्दी भाषी राज्यों में शिक्षा व्यवस्था की जो बदतर स्थिति है वह अत्यंत ही विचारणीय है।

                     यदि इस दिशा में मानव संसाधन विकास मंत्रालय सचमुच कोई पहल करता है, तो यह देश के शिक्षा व्यवस्था में गुणात्मक सुधार लाने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण, प्रभावशाली और सार्थक पहल होगी, जिसकी सख्त जरुरत है। दरअसल में शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण विभाग राज्यों के जिम्में होने ही नहीं चाहिए थे। ये संघ सूची में होने चाहिए। संविधान सभा एवं संविधान निर्माताओं की इस भूल या अनदेखी का खामियाजा आज हिन्दी भाषी क्षेत्र सबसे अधिक भुगत रहे हैं। इसी कारण हिन्दी भाषी राज्यों में पिछड़ापन है, गरीबी है, बेकारी है। इस पर गंभीरता से विचार-विमर्श करने की जरुरत है, और इसे तत्काल अमल में लाने की जरुरत है। इसी में राष्ट्रीय शिक्षा नीति की रचनात्मकता एवं सार्थकता है।
डा.लखन चौधरी, वरिष्ठ प्राध्यापक