सच कहना अगर बगावत है…!

छत्तीसगढ़ के पूर्व महाधिवक्ता कनक तिवारी के विचार

आज 25 दिसम्बर है। सत्य की सलीब पर बिंधने वाले संसार के इतिहास की सबसे पीड़ा भरी कुरबानी देने वाले यीशु का जन्मदिवस। सत्य के लिए सुकरात ने जहर पिया। हरिश्चंद्र ने परिवार की बलि चढ़ा दी। मोरध्वज ने बेटे को आरी से चीरा। युधिष्ठिर ने कलंक झेला। गांधी ने सत्य के साथ प्रयोग किए। संसार में केवल ईसा सलीब पर तिलतिल कर मरे। उससे ज्यादा तकलीफदेही की कल्पना नहीं की जा सकती। इसीलिए आज का दिन बड़ा कहलाता है। भूगोल और खगोल बताते हैं आज का दिन सबसे छोटा होता है। आज रात सबसे लम्बी रात होती है। दो हजार बरस पहले ईसा के जन्मदिन रात सबसे बड़ी रही थी। रात अंधकार की चादर है और दिन रोशनी का चेहरा। सबसे छोटा दिन सबसे बड़ा क्यों कहलाता है? सच की रोशनी अंधियारे की छाती चीर देती है। यीशु ने ऐसा इतिहास गढ़ा कि उनके अनुयायी गोरे देश बनकर हुकूमत कर रहे हैं।

आज नशे में बेलौस होकर धींगामस्ती करने का भी दिन बना दिया गया है। यह तो यीशु की आत्मा का सम्मान नहीं। सच यही है कि सच का ही दिन आज है। बैतलहम, येरुशलम बल्कि पूरा फिलस्तीनी इलाका खूंरेजी का शिकार है। ईसा, यहोवा और पैगम्बर में शीतयुद्ध है। रोमन कैथोलिक, एगनाॅस्टिक्स, प्रोटेस्टेन्टस और प्रेसबिटेरियन जैसे खेमों में बंटे ईसा के अनुयायियों के हाथ कत्लेआम से भी रंगे हैं। मुख में ईसा है और बगल में आतंकवाद। अमेरिकी और अंग्रेज अपने को बाइबिल का अध्येता, प्रवक्ता और भाष्यकार मानते हैं। विरोधियों को बाइबिल की भाषा में दंड देने का हुक्म दागते हैं। ईसा लाचार हैं, निरुत्तर हैं। सच के लिए ईसा शूली पर चढ़े। सच सरेआम जिबह हो रहा है। ईराक में घातक हथियार नहीं निकले। फिर भी हजारों इराकी मौत के घाट उतार दिये गये। अफगानिस्तान के लाखों बच्चे और औरतें यतीमों से भी गई गुजरी हालत में हैं। निकारागुआ में अनावश्यक कत्लेआम हुआ। वियतनाम ने क्या गुनाह किया था यीशु? हो ची मिन्ह जाबांज नेता था। तुम्हारे कौल की रक्षा हो गई। थाइलैंड में अमेरिकी सैनिकों ने पीढ़ियों के चरित्र का बलात्कार कर बरबाद कर दिया। तुम्हारे सत्य के कथित पंडे जहरीली दवाइयां, ड्रग्स और हथियार बेचे पड़े हैं। उनके लिए मनुष्य हाड़ मांस का पिंड भर है। टेलीविजन में अधनंगी औरतों के बचे खुचे कपड़े उतारे पड़े हैं। कई देशों के बेहतर बुद्धि के इन्सान इन गोरों के बन्धक हैं। अपनी मातृभूमियों पर अमेरिका के मुंह से थूक भी रहे हैं।

                     भारत में हालत बुरी है। आदिवासियों, दलितों का गरीबी और अशिक्षा के कारण धर्मपरिवर्तन किया जा रहा है। फादर स्टेन्स की हत्या हो गई। ईसाई ननों का बलात्कार किया जा रहा है। तुम्हारे जन्मदिवस के एवज में अच्छी खासी छुटिटयां भी मिलती हैं, प्रभु। शराब जीवन पर हावी हो गई है कि जीवन मदिरा ही सूख रही है। तुम्हारी ईसाइयत का पारिवारिक कानून बेहद तंगदिल है। यदि अलबत्ता ईसाई शैक्षणिक संस्थाएं और अस्पताल नहीं होते, तो गरीबों की हालत और खस्ता हो जाती। हे यीशु! भारत ने संविधान में धर्मनिरपेक्षता के अक्स को परवान चढ़ाया। मदर टेरेसा को भारत रत्न से नवाजा। तुम्हारी पुत्रियों एनी बेसेन्ट, श्री मां और भगिनी निवेदिता में नेता, मां और बहन को देखा।

दुनिया का भविष्य ईसा के कन्धों पर है। उनके विक्रम कंधों पर अमेरिकी बैताल बैठा है। वैश्वीकरण की आड़ में उनके आदर्शो का खात्मा कर रहा है। उसके लोकतंत्र के सामने खतरनाक अधिनायकवादों को भी पानी भरना पड़ रहा है। उसका इरादा ईरान, भारत और उत्तरी कोरिया की ओर कूच करने का लगता है। बम फोड़ने के साथ अभिशप्त लोगों को ही मुफ्त बाइबिल भी बांटता है। पूरे संसार से कहता है या तो उसका दोस्त बने या दुश्मन। वह लोकतंत्र में विश्वास नहीं करता। फिर भी ईसा का अनुयायी होने का दावा करता है। भारत में गांधी में तुम जिए। मजहबी विचारधारा वाले ने उनकी हत्या की। इन्दिरा और राजीव गांधी की भी। आदिवासियों, मुफलिसों के हक के लिए लड़ते इन्सानों को वे लोग अर्बन नक्सल कहते हैं जो रोज केवल झूठ बोलते रहते हैं।

                     लोकजीवन में सच का खात्मा हो रहा है। ईसा मसीह का हैप्पी बर्थ डे करोड़ों झूठनारायण मना रहे हैं। अदालतों के खिलाफ सच बोलने पर भी उनकी अवमानना होती है। सत्यवाचक को सजा होती है। बचना हो तो बिना शर्त माफी गिड़गिड़ाने की शैली में मांगनी पड़ती है। मसलन अरुंधति राय और प्रशांत भूषण ने ईसा को ठीक से पढ़ा है। माफी नहीं मांगी, तो नहीं मांगी। सच का हलफ उठाकर मंत्री, अफसर, जज घूस खाए जा रहे हैं। फोटो खिंचवाते घूस खाने का नया फैशन है। फिर भी मूंछें ऐंठी जा रही हैं। भ्रष्टाचारी मक्का मदीना भी जा रहे हैं। अंततः कुम्भीपाक नरक में सड़ना होगा, वे कुम्भ नहा रहे हैं। सच बेचारा रिक्शे वालों के पसीने, विधवाओं के आंसुओं और सैनिकों के खून में छिपा बैठा खुद को हलाक होता देख रहा है। सच बियाफरा, चेचन्या, सोमालिया जैसे देशों की हड्डियों में घुस गया है। उन्हें तोड़े बिना बाहर नहीं निकलता। सच यीशु को चाहता है। यीशु पुत्र बनने का दावा करने वाले साम्राज्यवादी मुल्कों से सच भी डरता है। सच की सफेद कबीरी चादर ईसा मसीह के जिस्म से लिपटी है। उस पर दाग या धब्बा नहीं था। अपने जन्मदिन रात को केक खाते, अपना बपतिस्मा कराते और दुनिया से क्षमाशील मुद्रा में उठ गए ईसा की दुनिया की हालत उसके बेटों ने कैसी कर रखी है। सच के लिए बड़ा दिन भी कितना छोटा हो गया है, यीशु!

       – कनक तिवारी
(फेसबुक वॉल से साभार)

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