सीएम भूपेश को बनाया गया था आरोपी, कोर्ट में हुआ खात्मा

साडा जमीं विवाद में भूपेश के परिवाद का हुआ खात्मा

रायपुर। एंटी करप्शन ब्यूरो के वर्तमान मुख्यमंत्री और पूर्व प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष भूपेश बघेल के खिलाफ दर्ज मामलों का खत्मा दुर्ग कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है। प्रदेश के मुखिया पर लगे आरोपों के ख़ात्मा अर्ज़ी की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने ये फैसला सुनाया है। तत्कालीन कलेक्टर द्वारा पेश की गई रिपोर्ट में उन्हें आरोपी बनाया गया था, जिस पर कोर्ट ने खात्मा रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया है। ACB ने खत्म रिपोर्ट में लिखा है कि “उक्त उल्लेखित मामलें की जांच में ये बात स्पष्ट रूप से प्रमणित हो गई है कि भूपेश बघेल के खिलाफ कोई मामला नहीं बनता।”


सीएम भूपेश पर के आरोप था कि पाटन विधानसभा क्षेत्र से विधायक रहते हुए उन्होंने साडा में बतौर सदस्य अपने पद का दुरुपयोग किया है। यह आरोप किसी और ने नहीं बल्कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के भतीजे और उनके खिलाफ चुनाव लड़ चुके विजय बघेल ने लगाए थे। विजय बघेल के साथ पूर्व विधायक वीरेंद्र पांडे और अधिवक्ता अशोक शर्मा ने भी इस मामले पर अपना अभिवेदन कोर्ट में प्रस्तुत किया था। गौरतलब है कि इस मामले की शिकायत मिलने के बाद तत्कालीन रमन सरकार ने यह पूरा मामला एंटी करप्शन ब्यूरो को सौंपा था। जिसके बाद तत्कालीन कलेक्टर आर संगीता की अध्यक्षता में एक जांच समिति बिठाई गई, जिसने भूपेश के खिलाफ रिपोर्ट दी थी। इस समिति की रिपोर्ट के आधार पर एंटी करप्शन ब्यूरो ने भूपेश बघेल और उनके परिजनों के ख़िलाफ़ अपराध दर्ज किया था, जिसे आज के सीएम ने पूर्ववर्ती सरकार को खुद पर दबाव बनाने की राजनीति और विद्वेष के तहत की गई कार्रवाई बताया था।

तीनों शिकायतकर्ताओं को भेजा नोटिस
इधर इस मामलें में ACB द्वारा खात्मा रिपोर्ट पेश करने के साथ ही कोर्ट ने तीनों शिकायतकर्ताओं को नोटिस भी जारी किया था। जिसमें विजय बघेल ने अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी, हालांकि इस आपत्ति को कोर्ट ने सिरे से खारिज कर दिया।

यह था मामला
भिलाई-3 की मानसरोवर योजना आवासहीन और निम्न आय वर्ग के लोगों को लिए यह योजना थी। लेकिन, 1995 में विधायक और साडा के मानद सदस्य पद पर रहते हुए बघेल ने अपनी पत्नी मुक्तेश्वरी और मां बिंदेश्वरी के नाम पर एलआईजी के 6-6 प्लाट आवंटित करवा लिया था। आरोप है कि ये प्लाट कम आय वर्ग के लिए थे, लेकिन बघेल ने दस्तावेजों में अपनी आय 25 हजार रुपए से कम दिखाई। नियमों में एक व्यक्ति को दो से अधिक प्लाट नहीं दिए जा सकते।