जोगी ने भरी दिल्ली में हुंकार, मौन जुलुस की शक्ल में घेरने पहुचें पीएम निवास

नई दिल्ली / रायपुर।  ने दिल्ली में छत्तीसगढ़ सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला। जोगी कांग्रेस के आला नेताओं समेत दर्जनों कार्यकर्ताओं के साथ अजीत जोगी ने निर्वाचन आयोग से प्रधानमंत्री निवास की तरफ मौन जुलुस निकाला। इस मौन जुलुस के ज़रिए जोगी प्रदेश में चल रही रमन सरकार के खिलाफ अपना रोष जता रहे है। जोगी ने रमन सरकार के खिलाफ 7 बिंदुओं का शिकायती पुलिंदा प्रधानमंत्री को सौपने कोशिश की मग़र उससे पहले ही उन्हें रोक लिया गया। जोगी के साथ पार्टी कोर कमेटी के कई सदस्य और कार्यकर्ता मौजूद है।

ये है जोगी का मांग पत्र

माननीय प्रधानमंत्री जी,

विदित हो कि छत्तीसगढ़ सरकार एवं केंद्र सरकार की कुछ नीतियों एवं निर्णयों का छत्तीसगढ़ की जनता पर विपरीत प्रभाव पड़ा है। आम जनता त्रस्त है। किसान, महिला, युवा, छोटे व्यापारी, पुलिस कर्मी, शिक्षक, मितानिन, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, कोटवार इत्यादि प्रदेश के हर वर्ग के लोग प्रदर्शन करने विवश हैं। इस संबंध में छत्तीसगढ़ सरकार के लचर रवैय्ये ने जनता की असंतुष्टि को आक्रोश बनाने का काम किया है। प्रदेश में चारों ओर आराजकता का माहौल है।
किसी राज्य के मुख्यमंत्री और उनकी सरकार अगर अपना दायित्व निर्वाहन करने में अक्षम और असमर्थ साबित होते हैं तो विवश जनता महामहिम राज्यपाल और उसके उपरांत, देश के प्रधानमंत्री के समक्ष अपनी समस्याओं को लेकर जाती है।
हम ,छत्तीसगढ़ के क्षेत्रीय दल , जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के कार्यकर्ता पार्टी अध्यक्ष एवं छत्तीसगढ़ के प्रथम मुख्यमंत्री माननीय अजीत जोगी जी के नेतृत्व में आपको छत्तीसगढ़ की जनता की सात सूत्रीय मांगों से अवगत करा रहे हैं।

माँगें:

1) 2013 के वादे अनुसार के किसानों को 2100 रुपये समर्थन मूल्य और बक़ाया ३ साल का ₹300 बोनस दिया जाए। जब भाजपा शासित महाराष्ट्र एवं उत्तर प्रदेश में ऋण माफी की जा सकती है तो छत्तीसगढ़ के किसानों के साथ सौतेला व्यवहार न किया जाए। किसान आत्महत्या की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए तत्काल ऋण माफ भी किया जाना चाहिए।

2) छत्तीसगढ़ सरकार की आउटसोर्सिंग नीति पर तत्काल रोक लगाई जाए। स्थानीय भर्तियों में छत्तीसगढ़ के स्थानीय युवाओं को 90% आरक्षण मिले। साथ ही कपड़ा धुलाई, दूध सप्लाई, मछली पालन आदि पाराम्परिक कार्य एवं जाति वर्ग से संबंधित ठेके दिल्ली, नागपुर, हैदराबाद और गुजरात की कंपनियों को न देकर छत्तीसगढ़ के धोबी समाज, यादव समाज एवं केंवट समाज के लोगों को दिये जायें।

3) छत्तीसगढ़ के 40 हज़ार परिवारों एवं संरक्षित जनजातियों को नष्ट कर रहे पोलावरम बांध के कार्य पर तत्काल रोक लगाई जाए। प्रभावित क्षेत्र में केंद्रीय पर्यवेक्षकों की उपस्थिति में सर्वप्रथम जनसुनवाई कराई जाए, उनको बोलने का अवसर दिया जाए और उनको सुना जाए।

4) नगरनार इस्पात संयंत्र के निजीकरण पर रोक लगाए केंद्र सरकार। निजीकरण का निर्णय बस्तर के लोगों के साथ धोखा है। बस्तरिया युवाओं को एनएमडीसी नगरनार संयंत्र में रोजगार में प्राथमिकता दी जाए।

5) महानदी, इंद्रावती और कनहर नदियों से संबंधित अंतरराज्यीय समझौतों में छत्तीसगढ़ के साथ हो रहे अहित को रोका जाए। इन नदियों के पानी पर पहला अधिकार छत्तीसगढ़ के किसानों का है।

6) छत्तीसगढ़ की सम्पूर्ण अर्थव्यवस्था उत्पादन आधारित है जबकि जीएसटी केवल उपभोग पर देय है। इससे छत्तीसगढ़ को हो रहे सालाना ₹ 25 हज़ार करोड़ के नुक्सान की भरपाई केंद्र सरकार द्वारा की जाए।

7) छत्तीसगढ़ की 35 प्रतिशत से ज्यादा आबादी आदिवासी/ अनुसूचित क्षेत्रों में निवासरत है। उनको सरकार द्वारा अवैधानिक तरीक़े से डीलमिली, नगरनार, घाटबर्रा आदि जगह उनके घरों और ज़मीन से जिस प्रकार बेदख़ल करा जा रहा है, उसका सीधा परिणाम ‘पत्थरगढ़ी’ आंदोलन है। सुदूर अंचलों के लोगों के अस्तित्व पर मँडराते ख़तरे तथा नक्सल समस्या के विकराल रूप को देखते हुए, छत्तीसगढ़ राज्य को “विशेष राज्य” का दर्जा दिया जाए ताकि छत्तीसगढ़ दूसरे विकसित राज्यों के समानांतर विकास कर सके।

आप राष्ट्र के प्रधानमंत्री है। छत्तीसगढ़ की जनता को आपसे आशाएं हैं कि आप जनहित में रखी गयी उपरोक्त सात मांगों का अध्ययन कर छतीसगढ़ के हित में उचित कदम उठाएंगे।

धन्यवाद ।

भवदीय,
जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे)