जल्द शुरू हो सकता है प्रदेश कांग्रेस में इस्तीफों का दौर

रायपुर। प्रदेश कांग्रेस कमेटी में जल्द ही इस्तीफों का दौर शुरू हो सकता है। ये इस्तीफा प्रदेश कांग्रेस के कुछ पदेन पदाधिकारी और जिला अध्यक्ष दे सकते है। इन इस्तीफों के पीछे वज़ह जानने जब तफ्तीश की गई तो मामला आगामी विधानसभा चुनाव से जुड़ा मिला। दरअसल पार्टी आलाकमान राहुल फार्मूले पर इस बार छत्तीसगढ़ में सारी टिकट बांटी जाएंगी। राहुल ने बकायदा इसके लिए अपने सुपरविजन में सर्वे भी कराया है। इस रिपोर्ट में जिन जिन बिंदुओं पर सर्वे हुआ है, उसमे एक बिंदु ये भी था कि कितने जिला अध्यक्ष, प्रदेश पदाधिकारी, जिला पंचायत अध्यक्ष और मेयर विधायक चुनाव जीत सकते है। इसमें संगठन के कुछ पदाधिकारियों पर रिपोर्ट अच्छी मिली है मगर, रिपोर्ट में लिखी एक नोट ने सारा खेल बिगाड़ा। उस नोट में कहा गया है, यदि पदाधिकारी चुनावी मैदान में उतारते है तो उन्हें अपने पद से इस्तीफा देकर चुनाव लड़ना होगा। जिससे वे अपने विधानसभा क्षेत्र में फोकस रहकर काम कर सके और पदाधिकारी अपनी जिम्मेदारी पूरी ईमानदारी से निभा सके।
सर्वे टीम ने अपनी रिपोर्ट भी राहुल गांधी को सौप दी है। जिस पर पार्टी अब अपने दावेदारों का नाम तय करने मंथन कर रही है। विचार मंथन के बाद संभवतः अगस्त के दूसरे हफ़्ते तक कांग्रेस अपनी पहली सूची ज़ारी कर सकती है। इसके लिए दिल्ली दरबार की हरीझंडी के बाद पार्टी पदाधिकारी अपना इस्तीफा सौप कर चुनावी तैयारीयों में जुटेंगे, साथ ही ने पदाधिकारियों को जिम्मेदारियां भी सौपी जाएगी।

मेयरों का पत्ता कट
टीम राहुल के इस सर्वे रिपोर्ट में सबसे खस्ता हाल कांग्रेस के मेयरों का है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक़ सर्वे रिपोर्ट में कांग्रेस अगर अपने किसी भी महापौर को टिकिट देती है तो उसे उस सीट पर सीधा नुक्सान उठाना पड़ सकता है। जिसके पीछे जनता के बीच उनके खिलाफ़ फैली नाराज़गी सबसे बड़ा कारण है। पानी नाली सफाई जैसी मुलभुत समस्याओं को लेकर लोग सीधे मेयर को अटैक करते है ऐसे में उनकी दावेदारी भी खटास में जा सकती है।

दशमलव 75 है मतातंतर
तीन दफे विपक्ष में बैठने की वजह से कांग्रेस की हार के हर पहलुओं को कांग्रेस और खुद राहुल गांधी बहोत बायरिकी से समझ रहे। इन कमी और गलतियों पर एआईसीसी की टीम पुरे पांच सालों से काम कर रही है। छत्तीसगढ़ में कांग्रेस और भाजपा में जीत हार का अंतर भी महज़ 0.75 है, लिहाज़ा इसबार कांग्रेस हार के इस मतातंतर को ख़त्म कर सत्ता में काबिज़ होने भरसक प्रयास कर रही है।