त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव कोरिया : कांग्रेस के लिए चुनौती

तो भाजपा में परिवारवाद का विरोध, गोंगपा का पूरा फोकस पंचायत

बैकुंठपुर। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के लिए आचार संहिता लग चुकी है, वही कोरिया जिले में सत्ताधारी दल कांग्रेस के लिए नगरीय निकाय में मिली औसत जीत के बाद त्रिस्तरीय चुनाव में सफलता हासिल करना बहुत बड़ी चुनौती है। नई सरकार के एक साल में लोकसभा में मिली करारी हार के बाद नगरीय निकाय में सिर्फ नगर निगम चिरमिरी में कांग्रेस को स्पष्ट बहुमत मिल पाया है। वहीं भाजपा में भी परिवारवाद का विरोध शुरू हो गया है, तो गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने अपना पूरा फोकस त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव पर कर रखा है।

24 दिसंबर को नगरीय निकाय के नतीजों ने कांग्रेस की कलई खोल कर रख दी, विधानसभा जीत के बाद से पार्टी गुटबाजी से ग्रसित है, वहीं विधानसभा में जीत दिलाने वाले दरकिनार कार्यकर्ता आज भी दूर ही है। वर्तमान में जिला पंचायत सदस्य अपनी अपनी सीट बदलने को लेकर अन्य सीट पर लड़ने की रणनीति बनाने में जुटे हैं।

30 दिसंबर से नाम निर्देशन की शुरुआत हो जाएगी। ऐसे में भाजपा कांग्रेस को अपनों से ही जूझकर एक समर्थित प्रत्याशी खोजने में कई परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। क्योंकि दोनों की दलों में कई दावेदार खुलकर मैदान में आने की तैयारी में जुटे हुए हैं। इस सीट पर वर्तमान में गोडवाना गणतंत्र पार्टी की सरोजनी कमरो के पास है, वो इस समय जिला पंचायत की उपाध्यक्ष है, यही कारण है पार्टी इस बार फिर अपनी सीट पर कब्जा जमाने पूरा जोर लगा रही है।

परिवारवाद का हुआ विरोध
भाजपा के सलका मंडल में हुई बैठक में कई दावेदारों ने यहां के लिए खुलकर दावेदारी कर दी। इस बैठक में सात लोगों ने अपनी दावेदारी जताई है, अब देखना है किसे पार्टी अपना सर्मर्थित प्रत्याशी घोषित करती है। वहीं बैठक में दावेदारों ने खुलकर परिवारवाद कर विरोध किया, कुछ ने बैठक में कहा कि अब चुनावों में कार्यकर्ताओं की पूछ होना चाहिए, हमेशा बडे़ नेताओं को टिकट दिया जाता है या उनके रिश्तेदारों को, ऐसा अब नहीं होगा, वो भी कार्यकर्ता है और चुनाव जीतने का माद्दा रखते है। पार्टी को आम कार्यकर्ताओं को जोडे़ रखने के लिए उन्हें मौका देना चाहिए।

कांग्रेस में भी कई दावेदार
जिला पंचायत के सलका जिला पंचायत क्षेत्र में कांग्रेस के कई दावेदार सामने आ रहे है, राजवाडे़ बाहुल्य होने के कारण यहां से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गणेश राजवाड़े और महिला कांग्रेस की जिलाध्यक्ष संगीता राजवाडे़ का नाम प्रमुख है जो इस चुनाव में उतरने का मन बना चुके हैं।

कांग्रेस इस सीट को हासिल करने का पूरा जोर इसलिए लगा रही है क्योंकि बीते 10 सालों में एक बार भाजपा और एक बार गोंडवाना ने जीत दर्ज कर कांग्रेस को तीसरे स्थान पर ला खड़ा कर दिया है।

धान पर छिड़ी रार
एक ओर कांग्रेस जिला, जनपद स्तर पर चुनाव को लेकर रणनीति बनाने में जुटी है, दूसरी ओर धान खरीदी को लेकर किसानों में बेहद नाराजगी देखी जा रही है। वहीं बीते एक साल के कार्यकाल को लेकर भी ग्रामीणों में काफी गुस्सा है, क्योंकि साल भर बीतने को है, किसी भी तरह की पेंशन नहीं मिलने से ग्रामीण नाराज है।

वहीं मनरेगा से ग्रामीणों की मजदूरी ना मिलने के साथ ग्रामीणों को काम भी नहीं मिला है, जिला पंचायत में जारी भ्रष्टाचार के कारण ग्रामीणों को विकास कार्यों का कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है।

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