छत्तीसगढ़ में इसलिए खरीदी जा रही 35 हज़ार नई ईवीएम…


रायपुर। देशभर में मचे ईवीएम हैकिंग के आरोप प्रत्यारोप से बचने छत्तीसगढ़ निर्वाचन आयोग ने बड़ा फैसला लिया है। आयोग ने विधानसभा चुनाव 2018 के लिए 35 हज़ार 150 नई ईवीएम मशीनें खरीदने की तैयारी में है। इतना ही नहीं राज्य में उपयोग होने वाली सभी वीवीपीएटी मशीन और पीठासीन अधिकारी के पास रहने वाली कंट्रोल यूनिट भी बिल्कुल नई होंगी। प्रदेश के नए मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी सुब्रत साहू को ज्वाइंट सीईओ समीर विश्वनोई, डिप्टी सीईओ यूएस अग्रवाल, स्वीप कार्यक्रम प्रभारी केआर सिंह, असिस्टेंट सीईओ एमएल सोनी, डिप्टी डायरेक्टर फाइनेंस श्रद्धा त्रिवेदी कुमार जैसे नए और अनुभवी अफसरों-कर्मचारियों की टीम मिली है। उन्होंने केंद्रीय निर्वाचन आयोग के निर्देश के अनुसार चुनावी ब्लूप्रिंट तैयार करना शुरू कर दिया है। प्रदेश में इस चुनाव में अधिक बूथ होंगे। पिछली बार 22 हजार 929 थे जो बढ़कर 23 हजार 411 हो गए है। लगभग 29 हजार 300 कंट्रोल यूनिट व वीवी-पैट भी ईसीआई हैदराबाद में ही बन रही हैं।

ये है नई मशीनें खरीदने की मुख्य वजह
छत्तीसगढ़ में बीतें तीन चुनावों में भाजपा और कांग्रेस के बीच जित हार का अंतर बेहद करीबी रहा है। साल 2003 के विधानसभा चुनाव भाजपा ने कांग्रेस को 2.55 फीसदी वोटों के अंतर से हराकर सत्ता पाई थी। इसके बाद साल 2008 में जीत का अंतर और कम होकर 1.70 प्रतिशत हो गया। साल 2013 के चुनावों में कांग्रेस सरकार बनाने से महज़ 0.76 यानी पौन प्रतिशत वोटों से चूक गई। ऐसे परिणामों को देखते हुए निर्वाचन आयोग चुनाव के दौरान किसी भी तरह का कोई विवाद नहीं चाहता, लिहाज़ा आयोग ने नई मशीनों से चुनाव कराने का फैसला लिया है।

निष्पक्ष और निर्विवाद चुनाव कराने हम प्रतिबद्ध है। चाहे वोटर लिस्ट का मामला हो, बूथों की संख्या बढ़ाने का या फिर नई ईवीएम का। हमारा टारगेट ज़्यादा से ज़्यादा वोटर्स को बूथों तक लाने का है जिसके लिए हर संभव प्रयास भी किए जा रहे है।
सुब्रत साहू, मुख्य निर्वाचन अधिकारी, छत्तीसगढ़