मुख्यमंत्री से बोले बघेल, मेरे चश्मे का नंबर तय कर दिखाएं विकास


रायपुर। विकास की चिड़िया पर छत्तीसगढ़ की सियासत अब गरमाते जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह और प्रदेश अध्यक्ष के बिच चल रहे ज़बानी जंग अब और भी तल्ख हो गई है। भूपेश बघेल ने मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह को विकास दिखाने सम्बन्धी पत्र लिखा है। बघेल ने पात्र में मुखिया के जवाब का पलटवार करते हुए लिखा है कि भले ही मेरे चश्मे का नंबर, फ्रेम और रंग आप तय करिए मग़र विकास तो दिखाइए।
बघेल ने लिखा है कि आप जानते हैं कि जब तक बहुत आवश्यक न हो मैं आपको पत्र नहीं लिखता. लेकिन यह पत्र मैं गहन पीड़ा और दुख के असह्य दबाव में लिख रहा हूं। मुझे मीडिया के जरिए पता चला कि आपने लोगों से अपील की है कि वे कांग्रेस के नेताओं से पूछें कि विकास किस चिड़िया का नाम है। मुझे आश्चर्य भी हुआ और दुख भी कि 15 वर्षों तक प्रदेश में सरकार चलाने के बाद भी आपको विकास नाम की चिड़िया का पता पूछने के लिए विपक्ष में बैठी कांग्रेस की सहायता लेनी पड़ रही है। थोड़ी गंभीरता से विचार किया तो लगा कि आपने कांग्रेस के जिम्मे एक बेहद कठिन काम सौंप दिया है क्योंकि विकास नाम की चिड़िया का पता लगाना छत्तीसगढ़ में लगभग असंभव है। मैंने प्रस्ताव रखा कि मैं आपके साथ सड़क मार्ग से यात्रा करके विकास नाम की चिड़िया की तलाश करूंगा लेकिन आपने तो मेरे चश्मे का नंबर पूछ लिया. दुर्भाग्य की बात है कि जब हम विकास की बात कर रहे हैं तो आप व्यक्तिगत हुए जा रहे हैं।

किसान, आदिवासी और महिला सुरक्षा ज़िक्र
बघेल ने अपने खत में किसान को बोनस, किसानों को पानी, आदिवासियों की ज़मींन, भूमि अधिग्रहण कानून, लापता महिलाओं, नसबंदी काण्ड, मीना खलखो, पेद्दागेलूर में घटी रेप की घटना, जैसे तमाम मामलों का उल्लेख किआ है। बघेल ने मुख्यमंत्री निवास के सामने हुई आत्मदाह के दौरान मौत के मामलें का भी ज़िक्र किया है। बघेल ने लिखा है कि क्या यह मेरे चश्मे का दोष है कि एक विकलांग युवक आपके निवास के सामने बेरोजगारी की मार से आत्मदाह कर लेता है। आपने छत्तीसगढ़ को बेरोजगारों का गढ़ बना दिया है और लगभग 44 लाख बेरोजगार दर बदर की ठोकरें खा रहे हैं

और यूँ कसा तंज़
बघेल ने कुछ इस अंदाज़ में मुखिया पर तंज़ कसा है। बघेल ने लिखा कि रमन सिंह जी, मुद्दे और बातें बहुत हैं. मैं ईमानदारी से छत्तीसगढ़ की दो करोड़ 76 लाख जनता के लिए चिंतित हूं जो आपके कथित विकास के नारे का शिकार है और रोज रोज ठगी जा रही हैं। चुनाव आ रहे हैं. यह चुनाव में हार जीत का सवाल नहीं है. यह सिर्फ जनता के हित का सवाल है. आप चाहें तो मेरे चश्मे का नंबर अपने डॉक्टरों से चेक करवा लीजिए लेकिन एक बार मेरे साथ विकास की चिड़िया की तलाश में तो चलिए। मैंने आपको एक सार्वजनिक निमंत्रण भी भेजा है। पता नहीं आपकी सलाहकार एजेंसियों ने आपको खबर दी या नहीं, लेकिन मैं अपने निमंत्रण पर कायम हूं. जगह आप तय कीजिए, मेरे चश्मे का नंबर आप तय कीजिए, मेरे चश्मे में लगे फ्रेम और कांच का रंग आप तय कीजिए लेकिन पौने तीन करोड़ जनता की बात पौने तीन करोड़ जनता को ही तय करने दीजिएं चलिए ना एक बार मेरे साथ सड़क यात्रा से विकास की चिड़िया देखने दिखाने. विकास किया ही है तो इस प्रस्ताव को टाल क्यों रहे हैं?

आपका “अभिन्न मित्र”
भूपेश बघेल