सर्वधर्म समभाव का संदेश लेकर जागनी रथयात्रा पहुंची रायपुर

रायपुर। महामति श्री प्राणनाथजी के 400 वें प्राकट्य वर्ष के उपलक्ष्य में श्री कृष्णप्रणामी विश्व परिषद दिल्ली द्वारा उनके संदेश को जन-जन तक पहुंचाने विश्वव्यापी जागनी रथ यात्रा निकाली गई है। यह यात्रा दुर्ग से होकर आज सुबह रायपुर पहुंची जहां श्रीकृष्ण प्रणामी संप्रदाय से जुड़े अनुयायियों ने रथ और शोभायात्रा का गाजे-बाजे व पुष्प वर्षा के साथ भव्य स्वागत किया। यात्रा रोजाना 200 से 250 किमी का मार्ग तय करती है, दल में प्रमुख संतों समेत 19 सदस्य साथ चल रहे हैं। यात्रा का मुख्य उद्देश्य सर्वधर्म समभाव का संदेश देना है। विश्व शांति-विश्व बंधुत्व से ही संसार में खुशहाली आयेगी यही बताया जा रहा है। शाम के सत्र में प्रदेश के कृषि व जल संसाधन मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल भी शामिल हुए।
विद्वान संतों व ब्रम्हमुनियों के साथ जागनी रथयात्रा का मंगलवार को रायपुर पहुंचने पर सीए राजेश प्रेम अग्रवाल के नेतृत्व में श्रीकृष्ण प्रणामी सुंदरसाथगण के सदस्यों ने जोरादार स्वागत किया। पश्चात भीमसेन भवन समता कालोनी में संतों ने श्रीकृष्ण प्रणामी धर्म को मानने वाले निजानंद संप्रदाय से जुड़े सैकड़ों लोगों को यात्रा का उद्देश्य बताया। सत्संग में प्रमुख रूप से पूज्य 108 श्री मोहन प्रिया आचार्य (प.बंगाल), श्री श्यामनंद महाराजजी (चंडीगढ़), श्री नारायण स्वामी (गुजरात) व श्री लीलारस सागर (प,बंगाल) ने आर्शिवचन दिए। महामति श्री प्राणनाथजी के दिव्य संदेशों को देश और विदेश में पहुंचाने 19 सितंबर 2017 को जामनगर गुजरात से यह यात्रा शुरू हुई और जून 2019 में दिल्ली में समाप्त होगी। वैसे तो रोजाना 200 से 250 किमी चलते हैं लेकिन काठमांडू से लखनऊ तक के 550 किमी की यात्रा भी उन्होने अनवरत पूरी की,जो कि अब तक की सबसे बड़ी दूरी थी। रथ में महामति प्राणनाथ का स्वरूप एंव हस्तलिखित वाणी तारतम सागर शोभायमान हैं।
संतों ने बताया कि धार्मिक एकता व सद्भाव के प्रतीक श्री कृष्ण प्रणामी धर्म अर्थात निजानंद संप्रदाय की स्थापना आद्य संस्थापक सद्गुरु श्री देवचंद्र जी महाराज ने की थी, उनके बाद महामति प्राणनाथजी ने पूरे भारत का भ्रमण कर श्रीकृष्णप्रणामी  धर्म की ज्योति को प्रज्जवलित किया। इस संप्रदाय के छह प्रमुख सिद्धांत है -आत्म पहचान, एक ब्रम्हा की उपासना, प्रेम लक्षणा भक्ति, विश्व शांति-विश्व बंधुत्व, विश्व धर्म एकता और सेवा ही धर्म है। आज इस संप्रदाय के देश भर में 50 लाख से ज्यादा अनुयायी हैं। सभी जाति व भाषा के लोग एक साथ मिलकर उस परात्पर पुरूषोत्तम श्रीकृष्ण को इष्ट मानकर आराधना करते हैं। इसलिए इनके अनुयायियों को सुंदरसाथ कहा जाता है। इनके 600 से अधिक मंदिर व सामाजिक संस्थान हैं। श्रीकृष्ण प्रणामी की ओर से स्कूल, कॉलेज, हास्पिटल, गौ शाला, अनाथ आश्रम व वृद्धाश्रम का संचालन किये जा रहे हैं। जागनी यात्रा बुधवार की सुबह बिलासपुर के लिए प्रस्थान करेगी।