बस्तर के चुनाव में आंध्रप्रदेश और तेलंगाना की पैनी नजर

चुनाव प्रभावित करने से माओवादियों को रोकने बनाई ज्वाइंट स्ट्रैटजी

रायपुर। तक़रीबन 20-22 दिनों बाद बस्तर में पहले चरण के चुनाव होने है। सुरक्षा के लिहाज़ से छतीसगढ़ पुलिस, नक्सल ऑपरेशन में लगी फ़ोर्स और चुनाव निबटाने पहुच रही फोर्सों की कंपनियों के आलावा। पडोसी राज्यों की पुलिस भी पैनी निगाह जमाए हुए है। पहले चरण में बस्तर और राजनांदगांव की उन सीटों पर चुनाव होने हैं जहां माओवाद की समस्या है।

दरअसल आध्रप्रदेश, तेलंगाना और छतीसगढ़ नक्सलवाद प्रभावित इलाक़े है। बस्तर में जो भी हरकत होती है उसका आंध्र और तेलंगाना के इलाकों पर सीधा असर पड़ता है। बस्तर में 12 नवंबर को पहले चरण की वोटिंग होगी जबकि तेलंगाना में 7 दिसंबर को चुनाव है। लिहाज़ा सभी सीमावर्ती राज्यों ने सुरक्षा की संयुक्त रणनीति बनाई है। जब तक बस्तर में चुनाव हैं सीमा पर तेलंगाना पुलिस मदद करेगी। इसके बाद बस्तर की पुलिस तेलंगाना की सीमाओं को सुरक्षित रखने में ताकत लगाएगी। लिहाज़ा बस्तर के हर मूवमेंट की जानकारी दोनों राज्यों के सुरक्षा अधिकारियों को दी जा रही है। और ये दोनों राज्य भी उक्त जानकारी छतीसगढ़ को मुहैय्या करा रहे है। जिसके चलते लगातार नक्सल मूवमेंट में छतीसगढ़ को सफलता भी मिल रही है।

उड़नखटोले से पहुचेंगे मतदान दल
छतीसगढ़ के धुर नक्सल प्रभावित इलाकों में मतदान करने पोलिंग कराने वाली टीम को एयरफोर्स के चॉपर और हैलीकाप्टर की मदद से पहुचाया और लाया जाएगा। जिसमे सुकमा इलाक़े के 40 मतदान दलों को बाय एयर पहुचाया जाएगा और पोलिंग के बाद बाय एयर ही वापस स्ट्रांग रुम तक लाया जाएगा। साथ ही चित्रकोट विधानसभा क्षेत्र के 16 मतदान केन्द्रों की पूरी व्यवस्था जगदलपुर से की जाएगी।

 

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