मंतूराम का बड़ा ख़ुलासा : 6 और प्रत्याशियों को बिठाया, दी थी मारने की धमकी

दबाव में नाम वापस लेने वाले 6 प्रत्यशियों ने कोर्ट में दर्ज़ कराया बयान

रायपुर। अंतागढ़ टेप कांड मामले में केंद्र बिंदु मंतूराम पवार ने एक बार फिर मीडिया में खुलासा किया है। मंतूराम ने प्रेस कॉन्फ्रेंस लेकर कहा कि इस चुनाव में न सिर्फ मुझ पर बैठने का दबाव बनाया गया था, बल्कि मुझे एनकाउंटर में मार देने की खुली धमकी भी दी गई थी। मंतूराम ने कहा कि मैं अकेला नहीं मेरे अलावा छह प्रत्याशियों पर भी चुनाव में हिस्सा नहीं लेने का दबाव पिछली सरकार ने बनाया था। पवार ने कहा कि मेरे ही साथ साथ इन छह प्रत्याशियों को भी प्रलोभन और धमकी दोनों देखकर विधायक चुनाव से नाम वापस लेने कहा गया था।

                   जिसमें इन 6 प्रत्याशियों को 1 करोड़ रुपए देने की बात कही गई थी, लेकिन इन्हें 50 हज़ार देकर रफा दफा कर दिया गया। प्रेस कॉन्फ्रेंस में मंतूराम ने पूर्व सरकार के मंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री के अलावा सूबे के दो अफसरों को भी निशाने में लिया है। मंतूराम ने पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह, अजीत जोगी, पूर्व विधायक अमित जोगी, राजेश मूणत, मुख्यमंत्री सचिवालय से अमन सिंह, ओपी गुप्ता और डॉ पुनीत गुप्ता के नाम से कई खुलासे किए है। इनके साथ ही इस मामले में मंतूराम ने फिरोज सिद्धकी को इस पूरी डील का सबसे अहम क़िरदार बताया है। मंतूराम के साथ पहुंचे प्रत्याशी भीम सिंह उसेंडी, देवनाथ, महादेव उसेंडी, समंदर नेताम, भोजराज नाग और वीरेंद्र कुमार ने कोर्ट में धारा 164 के तहत अपना बयान दर्ज कराया है। इस बयान में उन्होंने पूरे मामले का जिक्र किया है। इसके अलावा धमतरी में इन सभी 6 प्रत्याशियों ने उक्त लिखित व्यक्तियों के नाम पर अपराध भी दर्ज कराया है।

मोहरा बना कर किया इस्तमाल
मंतूराम पवार ने आज के पत्रकार वार्ता में कहा कि भाजपा प्रवेश से पहले ही मुझे टिकट देने का आश्वासन दिया गया था लेकिन न विधानसभा टिकट दी गई और ना ही लोकसभा की टिकट। इतना ही नहीं पूरे अंतागढ़ के चुनाव में मुझे मोहरा बनाकर भाजपा ने मेरा अपमान किया है। पवार ने कहा कि पहले पैसों का लालच दिया गया, फिर जान से मारने की धमकी, जिसके बाद मैने दबाव में आकर यह फैसला लिया था। आज भी इनके दबाव और डर में मैं जी रहा हूं।

तो आज भी भाजपा की सरकार होती
मंतूराम ने कहा कि साल-2003 में सत्ता जाने के बाद अजीत जोगी रमन सिंह से मिल गए थे। 2008 में भाजपा के छत्तीसगढ़ में फिर से सरकार बनाने में अजीत-अमित जोगी का बड़ा हाथ था, और साल 2013 में भी यही दांव खेला गया। साल 2018 में भी कुछ इसी तरह के नतीजे आते पर अमित जोगी को कांग्रेस से निष्कासित कर पूरा खेल बिगाड़ दिया। मंतुराम ने अमित जोगी को पार्टी से बाहर निकालने के लिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को धन्यावद भी दिया। और कहा कि अजीत जोगी आज कभी कांग्रेस में होते तो शायद भाजपा की सरकार होती।