प्रदेश की संस्कृति को बरक़रार रखने सीएम ने लिया निर्णय

छत्तीसगढ़ में पारम्परिक अवकाश की घोषणा सहित स्कूलों में अब होगी छत्तीसगढ़ी भाषा में पाठ्यक्रम

रायपुर।छत्तीसगढ़ मे 15 साल बाद कांग्रेस की सरकार लौटी है। जिसमे एक ठेठ छहत्तीसगढ़िया भूपेश बघेल को ही सत्ता की बागडोर सौपी गयी।अब लोगो को एक आशा दिखाई दे रही है। प्रदेशवासियों को लगता है की भूपेश बघेल अपने कार्यकाल में प्रदेश में छत्तीसगढ़िया क्रांति लाएंगे। कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव 2018 के पहले अपने घोषणा पत्र में ही कहा था की सत्ता में आने पर सभी प्रदेश वासियों को प्रदेश के वास्तविकता से अवगत कराया जायेगा। इसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए राज्य सरकार ने अपना कदम बढाया है। इसी तारतम्य में छत्तीसगढ़ के पारम्परिक त्यौहार हरेली, तीजा, भक्त माता कर्मा जयंती के लिए राज्य में सार्वजनिक अवकाश की घोषणा की गई है। जिसकी अधिसूचना भी जारी कर दिया गया है। 5 जो नये सार्वजनिक अवकाश का ऐलान किया गया है उसकी तारीख का भी ऐलान कर दिया गया है।

भक्त माता कर्मा जयंती- 31 मार्च 2019 – रविवार
हरेली – 1 अगस्त 2019 – गुरुवार
विश्व आदिवासी दिवस – 9 अगस्त 2019- शुक्रवार
हरिततालिका तीज – 2 सितंबर 2019 – सोमवार
छठ पूजा – 2 नवंबर 2019 – शनिवार

इन पारम्परिक अवकाश को घोषित करने का मुख्य उद्देश्य छत्तीसगढ़ की संस्कृति को आम जनता के बीच पहुंचना है,ताकि आज की युवा पीढ़ी प्रदेश की संस्कृति से भलीभांति परिचित हो सके। साथ ही कार्यरत माताओं और बहनो को इन त्योहारों को मानाने में समय मिल सके।

स्कूलों में होगा छत्तीसगढ़ी भाषा का प्रयोग
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने छत्तीसगढ़ी भाषा पर विशेष जोर देना शुरू कर दिया है। मुख्यमंत्री अपने सभी अधिकारीयों की बैठक लेकर छत्तीसगढ़ में छत्तीसगढ़ी भाषा का उपयोग करने दिशा निर्देश दिया है। जिससे प्रदेश में हिंदी की जगह छत्तीसगढ़ी भाषा सभी की जुबान पर हो। उल्लेखनीय है की छत्तीसगढ़ी भाषा को राजभाषा का दर्जा मिले लगभग आठ साल हो गए लेकिन इसे अभी तक आठवीं अनुसूची में शामिल नहीं किया गया है जो सबसे बड़ी विडंबना मानी जा रही है। छत्तीसगढ़ी को अनुसूची में शामिल होने के बाद यह भाषा और बोली दोनों ही कहलाने लगेगा। जैसे दीगर राज्यों की भाषा होती है उसी प्रकार छत्तीसगढ़ की भी भाषा और बोली अलावा अन्य लोग भी जानने लगेंगे। हालाकि मुखयमंत्री भूपेश बघेल ने इसके लिए भरसक प्रयास करने की बात कही है। यही कारन है की मुख्यमंत्री ने अब इसे स्कूल स्तर पर भी शुरू करने की पहल की है। जिससे स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चो की छत्तीसगढ़ी भाषा की प्राथमिक जानकारी मिले। जिस तरह प्रदेश में छत्तीसगढ़ी के अलावा हल्बी, सरगुजिहा, कुडूख, दंतेवाड़ा गोंडी, कांकेर गोंडी प्रदेश के क्षेत्रा के अनुसार बोली जाती है,उसी को आगे बढ़ाते हुए अब स्कूलों में छत्तीसगढ़ी भाषा सहित हल्बी, सरगुजिहा, कुडूख, दंतेवाड़ा गोंडी, कांकेर गोंडी को पाठ्य सामग्री में शामिल करने पर जोर दिया है। मुख्यमंत्री ने शिक्षा विभाग को इसके लिए आने वाले स्कूली सत्र से ही पाठ्यक्रम में शामिल करने का निर्देश दे दिया है। जिसके लिए शिक्षा विभाग स्थानीय स्तर पर कार्य करना प्रारम्भ भी कर दिया है। विभाग प्रदेश के सभी भाषाओँ पर अलग अलग वीडियो भी तैयार करवा रहा है जिससे शिक्षकों को पहले प्रशिक्षण देकर तैयार कराया जा सके। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का मानना है की नन्हें बच्चों को उनकी भाषा में शिक्षा मिलने से उनकी शिक्षा अधिक स्वीकार्य एवं आनंददायी बन सकेगी। यही कारण है की राज्य सरकार छत्तीसगढ़ की उच्च संस्कृृतिक परम्परा को बनाए रखने के लिए लगातार कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने लिखा पहली बार लिखा छत्तीसगढ़ी में पत्र
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रदेश के आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं को छत्तीसगढ़ी भाषा में पत्र लिखकर छत्तीसगढ़ के ग्रामीण क्षेत्र में महिलाओं एवं बच्चों के देखभाल के लिये आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से किये जा रहे उनके कार्याें की सराहना की है।
मुख्यमंत्री ने पत्र में लिखा है कि- ‘तुंहर मन के प्रयास ले गॉव के तस्वीर बदलत हे’। मुख्यमंत्री में अपने पत्र में ऑगनवाडी कार्यकर्ता और सहायिकाओं को बहिनी संबोधित करते हुए कहा है कि ‘ मोर निवेदन हे कि तुमन छत्तीसगढ़ मा सुपोषण के अलख जगावव अउ ये छत्तीसगढ़ी महतारी के लइका मन ला स्वस्थ व सुपोषित बनावव।’


मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रदेश के आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं को पत्र लिखकर उन पर प्रदेश से कुपोषण को दूर करने का विश्वास जताया है। यही काऱण है की घोषणा पत्र में किये गए वादे के अनुसार राज्य सरकार ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं के मानदेय में भी वृद्धि कर दिया है,ताकि उन्हें किसी भी प्रकार की शिकायत न हो।