जोगी दल से अलग हो रहे कार्यकर्ताओं पर जोगी की सफाई

अजीत जोगी ने कहा,सलाह मशवीरा के बाद ही हो रहे है अलग

रायपुर। अजीत जोगी ने कांग्रेस से अलग होकर अपनी पार्टी बनाई। नाम दिया जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़। पार्टी को बने कुछ वर्ष ही बीते हैं,लेकिन जुबान पर छाया हुआ है। इसके बाद पार्टी ने विधानसभा चुनाव में कड़ी मशक्कत की और अपने साथ बहुजन समाज पार्टी को लेकर गठबंधन भी किया।

पार्टी ने विधानसभा चुनाव में 7 सीटों पर अपनी वजूद बनाने मे कामयाबी भी हासिल की। विधानसभा चुनाव के पहले भी कई पदाधिकारी जनता कांग्रेस छोड़कर दूसरे पार्टी में शामिल हुए थे, लेकिन विधानसभा चुनाव के ठीक बाद जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ जोगी की पार्टी से लगातार पार्टी छोड़ने का दौर जारी रहा। कई कद्दावर नेता जोगी के साथ जुड़े हुए थे, जो धीरे-धीरे उनके दामन से अलग हो गए। ज्यादातर पदाधिकारी जोगी को छोड़कर कांग्रेस में शामिल हो गए हैं। जिसे ये सभी लोग घर वापसी कह रहे है। इधर माना जा रहा है कि सत्ता में कांग्रेस आने के बाद स्वयं ही लोग खींचे चले आ रहे हैं। ऐसे में कई बार जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ के सुप्रीमो अजीत जोगी ने इस बयान का खंडन किया था। लेकिन शनिवार को उन्होंने साफ तौर पर कह दिया कि कुछ लोग राजनीतिक सेवा नहीं करने आते हैं बल्कि रोजगार की दृष्टि से राजनीति में प्रवेश करते हैं। इसलिए उन्हें इधर से उधर भटकने की आदत पड़ी हुई रहती है। अब जब हमारी पार्टी लोकसभा चुनाव नहीं लड़ रही है तो पदाधिकारियों ने इच्छा जताई पार्टी छोड़ने की तो मैंने उसे मंजूरी दे दी। जोगी का कहना है कि कार्यकर्ताओं को समझ में आ गया है कि उन्हें काम करना है इसलिए हमारी पार्टी को छोड़कर दूसरे पार्टी में प्रवेश कर रहे है। यह कोई बड़ी बात नहीं है। उन्होंने कहा कि हमने ही छुट दे दिया कि जिसके लिए चाहे उसके लिए काम कर सकते हैं। साथ ही उन्होंने पार्टी छोड़ने वालों पर तीरछी निगाह भी रखी है और कहा कि सत्ता की धुरी से दूर नहीं रहने वाले या कर चोरी जैसे कई काम करने वाले ही सत्ता से जुड़े रहने की चाहत में इस तरह से पार्टी बदलते रहते है।

janta congress chhattisgarhजोगी के चेहरे में छाई मायूसी

मीडिया के सामने अजीत जोगी ने उनकी पार्टी को किसी प्रकार की क्षति नहीं होने की बात कही। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि उनकी पार्टी क्षेत्रीय है, इसीलिए क्षेत्रीय चुनाव में ही उनकी पार्टी चुनाव आगे भी लड़ती रहेगी। फिर भी अजीत जोगी के चेहरे में एक मायूसी जरूर दिखाई दिया। और हो भी क्यों ना क्योंकि वह खुद एक कद्दावर नेता है और इसीलिए अपने साथ छोड़ते लोगों को देख रहे हैं और पार्टी की कमजोर स्थिति भी आंक रहे है। अब देखना होगा कि लोकसभा चुनाव के बाद निगम और पंचायत चुनाव में जोगी की पार्टी रणभेरी बजा पाती है या नहीं।