नक्सल मुठभेड़ में शुरू हुई सियासत, कांग्रेस ने बनाई 18 सदस्यीय जाँच कमेटी

नक्सल मुठभेड़ में माओवादी नहीं ग्रामीणों की मौत का किया दावा

रायपुर। 6 अगस्त को हुई नक्सल मुठभेड़ में सियासत शुरू हो गई है। आम आदमी पार्टी के बाद अब कांग्रेस ने भी इस मुठभेड़ में ग्रामीणों की हत्या का दवा किया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल ने इस मुठभेड़ के लिए कांग्रेस का एक जांच दल बनाया है।

18 सदस्यीय इस जांच दल का अध्यक्ष आदिवासी कांग्रेस प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मनोज मंडावी बनाए गए हैं। कमेटी में उपनेता प्रतिपक्ष कवासी लखमा, प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष रामदयाल उइके समेत तमाम क्षेत्रीय नेताओं को इस मामलें के जाँच का जिम्मा सौपा गया है।

Congress Janch Dal

कांग्रेस ने इस मामलें में कहा कि-ये मुठभेड़ प्रथम दृष्टया किसी भी तरह से मुठभेड़ प्रतीत नहीं हो रहे है। इस मुठभेड़ में वहां के स्थानीय ग्रामीणों के मारे जाने की आशंका कांग्रेसीयों ने जताई है। जिसकी सच्चाई जानने ये जांच दल सुकमा जिले के नुलकातोंग, गोमपाड़, वेलकापोच्चा, इंद्रेपार जैसे गाँवों में जाकर पड़ताल करेगी। इस मुठभेड़ के संबंध में चर्चा कर ग्रामीणों से चर्चा और मुठभेड़ स्थल तक जाकर कांग्रेस मामलें में तथ्य जुटाएगी। मामलें की जांच के लिए बनाई गई कमेटी पूरी पड़ताल कर अपनी जांच रिपोर्ट पीसीसी को सौपेगी।

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ये है कांग्रेस का जाँच दल
संयोजक आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मनोज मांडवी को बनाया गया है। कमेटी में उपनेता प्रतिपक्ष कवासी लखमा, प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष रामदयाल उइके, मोहन मरकाम, दीपक बैज, मलकित सिंह गैदू, सामू कश्यप, ओंमकार जायसवाल, करण सिंहदेव, विक्रम मंडावी, अजय सिंह, शंकर कुड़ियाम, रणजीत बख्शी, दुर्गेश राय, लालू राठौर, वेको हुंगा, शेख औलिया, लक्ष्मण मंडावी शामिल हैं।

आप ने भी उठाया था मामला
आप आदमी पार्टी (आप) के आदिवासी प्रकोष्ठ की अध्यक्ष सोनी सोरी ने भी इस मुठभेड़ को फ़र्ज़ी करार दिया था। उन्होंने कहा है कि पुलिसकर्मियों ने नक्सलियों से मुठभेड़ के नाम पर अपना गुड वर्क दिखाने के लिए बेगुनाह लोगों को मौत के घाट उतार दिया है। यह साधारण किसान थे, जिनको मार गिराए जाने के बाद पुलिस नक्सलवादी करार दे रही है। सोनी सोरी ने इस मुठभेड़ पर जताए जा रहे संदेह के आधार पर इसकी न्यायिक जांच की मांग भी की थी।