सीपीआई-बसपा-जनता कांग्रेस गठबंधन से इन सीटों में मजबूत हुए जोगी

बस्तर संभाग की दो सीटों में सीपीआई उतारेंगे अपने प्रत्याशी

रायपुर। छत्तीसगढ़ में बहुजन समाज पार्टी और जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के गठबंधन में एक और नाम रविवार को जुड़ा है। बसपा जोगी के साथ अब कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया भी इस गठबंधन में शामिल हो गया है। इस गठबंधन के बाद जनता कांग्रेस सुप्रीमों ने कहा कि कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया के शामिल होने से, मायावती के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में बने बसपा-जेसीसीजे-सीपीआई महागठबंधन की ताकत दुगुनी हो गयी है। और इसमें कोई संदेह नहीं है कि तीन समान विचारधारा के दलों का यह जनसमर्थित महागठबंधन, अगले माह होने वाले छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में महाविजयी गठबंधन सिद्ध होगा। सीपीआई के शामिल होने से बसपा-जेसीसीजे-सीपीआई महागठबंधन की पकड़ बस्तर सहित कई अन्य विधानसभाओं में मजबूत होगी, ख़ासकर उन क्षेत्रों में जहाँ मजदूर वर्ग बहुसंख्या में है।

जोगी ही होंगे मुख्यमंत्री पद के प्रत्याशी
गठबंधन के लिए सागौन बंगले पहुचे सीपीआई नेता ने कहा कि जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अजीत जोगी बसपा-जेसीसीजे-सीपीआई महागठबंधन की ओर से मुख्यमंत्री प्रत्याशी होंगे। संयुक्त प्रेस वार्ता में दोनों नेताओं सरकार पर भी चौतरफा हमला बोला है। संयुक्त प्रेसवार्ता में नेताओं ने कहा कि डॉ रमन सिंह के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार की निति और नियत दोनों जनविरोधी है।जो मुख्यमंत्री पिछले 15 वर्षों में छत्तीसगढ़ में गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने मजबूर, राज्य के 50 प्रतिशत लोगों को गरीबी के दलदल से बाहर नहीं निकाल पाया उसे मुख्यमंत्री बने रहने का कोई अधिकार नहीं है।

इन स्थानों पर भारी पड़ सकता है गठबंधन
बस्तर संभाग के दंतेवाड़ा और कोंटा विधानसभा सीटों में सीपीआई के प्रत्याशी महागठबंधन के संयुक्त प्रत्याशी होंगे। दंतेवाड़ा और कोंटा सीटों पर सीपीआई की शुरू से ही बहुत मजबूत पकड़ रही है। अविभाजित मध्यप्रदेश के समय 1990 और 1993 के चुनावों में इन दोनों सीटों पर सीपीआई ने जीत दर्ज की थी। इसके आलावा एसईसीएल, BALCO, भिलाई स्टील प्लांट, एनएमडीसी, एनटीपीसी, रेल्वे समेत अन्य उद्योगों में सीपीआई समर्थित श्रमिक संगठनों की सदस्यता पूरे छत्तीसगढ़ में सबसे अधिक है। छत्तीसगढ़ के श्रमिक आंदोलन में सीपीआई, दोनों भाजपा और कांग्रेस समर्थित श्रमिक संगठनों से बहुत आगे है। बसपा-जेसीसीजे-सीपीआई महागठबंधन को इस श्रमिक आंदोलन का साथ मिलने से मज़बूती मिलेगी।