जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की पहल

विश्व श्रमिक दिवस पर दुकानों में चलाया गया श्रमिक जागरूकता अभियान

रायपुर | विश्व श्रमिक दिवस के उपलक्ष्य में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण रायपुर द्वारा दुकानों में काम करने वाले श्रमिकों के लिए विधिक जागरूकता अभियान चला गया। प्राधिकरण के अध्यक्ष और जिला एवं सत्र न्यायाधीश राम कुमार तिवारी के निर्देश पर 01 मई को श्रमिक दिवस के अवसर पर पंडरी मार्केट रायपुर में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण रायपुर के सचिव उमेश उपाध्याय ने अपने पैरालीगल वाॅलिटियर और स्थानीय संस्था चेतना के कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर पंडरी कपड़ा मार्केट में भ्रमण किया। साथ ही मार्केट की दुकानों में जा जाकर वहां काम करने वाले श्रमिकों को श्रमिकों से संबंधित विधिक प्रावधानों वाली पुस्तक श्रम संदेश तथा बाल एवं किशोर श्रम संशोधन अधिनियम 2016 के प्रावधानों की जानकारी से संबंधित पाम्पलेट दिया।

                                               इस अभियान के दौरान सचिव उमेश उपाध्याय ने मार्केट में काम करने वाले कई श्रमिकों से बात करके उनके अधिकारों के संबंध में जानकारी दी। इस अभियान के दौरान कई दुकानों में ऐसे किशोर श्रमिक काम करते नजर आए जो 18 वर्ष से कम आयु के थे। संशोधन अधिनियम के नवीन प्रावधानों के अनुसार 14 वर्ष से 18 वर्ष आयु वर्ग के श्रमिकों को किशोर श्रम की सेवा में माना गया है और इनके संबंध में यह प्रावधान किया गया है कि, इन किशोर श्रमिको को किसी खतरनाक नियोजन में नहीं रखा जाएगा। खतरनाक नियोजन के अतिरिक्त नियोजनों में भी इन किशोर श्रमिकों से 6 घंटे से अधिक काम नहीं लिया जाएगा। एक बार में अधिकतम 3 घंटे की अवधि से अधिक काम नहीं लिया जाएगा और कम से कम 1 घंटे का विश्राम अंतराल दिया जाएगा। मार्केट में काम करने वाले श्रमिकों को इस बात की भी जानकारी दी गयी कि, किसी भी किशोर से शाम 7 बजे से सुबह 8 बजे के बीच कार्य नहीं कराया जाएगा। साथ ही प्रत्येक किशोर को सप्ताह में एक संपूर्ण दिन की छूट्टी देनी होगी। इस अभियान के दौरान बाजार में कई दुकानदारों को इस बात की जानकारी भी दी गयी कि, वे अपनी दुकानों में 14 वर्ष से कम आयु के बाल श्रमिकों को नहीं रखें और 14 वर्ष से 18 वर्ष आयु वर्ग के किसी किशोर को काम पर रखने की दशा में उन्हें इस बात की लिखित जानकारी संबंधित क्षेत्र के निरीक्षक को भेजनी होगी। यदि उनके द्वारा इन प्रावधानों का उल्लंघन किया जाता है तो उन्हें श्रम अधिनियम के अंतर्गत आपराधिक कार्यवाही एवं दंड का सामना करना पड़ सकता है। अभियान के दौरान विभिन्न दुकानदारों को जानकारी दी गयी कि, यदि किसी व्यक्ति द्वारा किसी बालक या किशोर को विधि के उल्लंघन में काम पर रखा जाता है तो 6 माह से लेकर दो वर्ष तक के कारावास या बीस हजार से लेकर पचास हजार रूपये तक के जुर्माने या दोनों की सजा हो सकती है। इस अभियान के दौरान कई दुकानदारों ने श्रम अधिनियम के ऐसे प्रावधानों की जानकारी नहीं होने की बात कही और प्राधिकरण के इस अभियान के लिए धन्यवाद भी दिया।

संपर्क के लिए टोल फ्री नंबर जारी
इस अभियान के दौरान कई श्रमिको ने बताया कि, उन्हें उचित वेतन और अवकाश नहीं मिलता, तथा उनके काम के घंटे भी निश्चित नहीं है। अभियान के दौरान कई दुकानदारों ने कहा कि, श्रम अधिनियम के इन प्रावधानों की जानकारी के बाद वे अपने यहां काम कर रहे किशोरों को विधि अनुसार सुविधाए प्रदान करेंगे। विभिन्न विधिक समस्याओं के संबंध में निःशुल्क विधिक सहायता एवं अन्य कानूनी मदद हेतु कार्यालय जिला विधिक सेवा प्राधिकरण में संपर्क कर सकते है या कार्यालय के दूरभाष क्रमांक 07712425944 से या राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण से टोल फ्री नंबर 18002332528 से संपर्क कर सकते हैं ।

प्राधिकरण ने की आम जन से अपील
इस अभियान के संबंध में प्राधिकरण के द्वारा आम जनता से यह अपील की गयी कि, यदि उन्हें किसी दुकान या प्रतिष्ठान में कोई बाल श्रमिक काम करता हुआ दिखाई दे तो वे तत्काल इस बात की सूचना चाईल्ड हेल्प लाईन 1098 या पुलिस को दें और जिम्मेदार नागरिक का कर्तव्य निभाए। प्राधिकरण के सचिव श्री उमेश उपाध्याय ने कहा कि, आपके द्वारा किसी बच्चे को बाल श्रम की जंजीरों से मुक्त कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होंगा जो उस बच्चे का पूरा जीवन बना सकता है।