गंगरेल से छोड़ा हुआ पानी हुआ “हाइज़ैक” निगम अफ़सरों में मची ख़लबली

रायपुर। जी बिल्कुल सही पढ़ा आपने ! राजधानी के कुछ किलोमीटर दूर ही बनी एक कच्ची सड़क ने खारुन के पानी का रास्ता बदल दिया। हालाँकि मामलें में आनन फ़ानन निगम अफसरों ने पीएचई अफसरों से तालमेल कर मामला निपटाने में लगे हुए है।
दरअसल नगर निगम रायपुर पीएचई से हर महीने 20 करोड़ देकर 6000 क्यूसेक पानी राजधानी को पिलाने खरीदती है। हर रोज़ निगम को तक़रीबन 200 क्यूसेक पानी निगम खारुन नदी से लेता है। भीषण गर्मी झेल चुकी राजधानी में हर रोज की सप्लाई के बाद से लगातार फ़िल्टर प्लांट का लेवल डाउन होता जा रहा था। प्लांट में खारुन से ही पानी नहीं पहुंच पाने की समस्या सामने आई। तब जाकर निगम अफसरों की नींद खुली और मामलें की गंभीरता को समझते हुए पड़ताल शुरू की गई। खारुन में लगातार कम होते जलस्तर पर भारी खोजबीन के बाद निगम और पीएचई अफ़सरों को मामला समझ आया। केंद्र के पास बन रहे एक्सप्रेस वे में मटेरियल सप्लाई के लिए बनाई गई एक कच्ची सड़क ने गंगरेल से आने वाले पानी की दिशा बदल दी। ये सड़क भी खारुन के लिए आने वाले नहर पर ही बना दी गई थी, जिसकी वजह से रायपुर की तरफ आने वाला पानी आस पास के खेतों में जा घुसा। और राजधानी की स्तिथि कंठ सूखने तक जा पहुंची थी। मामलें में अफसरों ने आनन फानन में इसकी वैकल्पिक व्यवस्था करते हुए खारुन तक पानी पहुंचाया। जिसके बाद मंगलवार शाम की सप्लाई से स्थिति में थोड़ा सुधार आया।

10 जुलाई तक प्रभावित रहेगी सप्लाई
मिली जानकारी के मुताबिक खारुन के लिए गंगरेल से आने वाली नहर में बनाई गई सड़क पर एक्सप्रेस वे का काम 10 जुलाई तक चलेगा। जिसके चलते खारुन का जल स्तर भी प्रभावित होगा। ये सड़क 10 जून के आस पास बनाई गई थी। पीएचई के अधिकारी खारुन के गिरते जलस्तर को देखने के बाद अब सड़क काटकर पानी के लिए रास्ता बनाया है, जिसके बाद पानी रायपुर तक पहुंच पाया है। हालांकि निगम उपयुक्त सौम्य चौरसिया ने दावा किया है कि इस सड़क के बाद भी 10 जून से 28 जून तक पानी की सप्लाई बेन्द्री से पाइप लाइन के ज़रिए कराई गई थी। उसी पाइप लाइन में रिपेरिंग का काम करने की वज़ह मामला गड़बड़ाया है।