दुर्गा अष्टमी : कालीबाड़ी और बंगाली दुर्गा पंडालों में हुई संधि पूजा, दी गई बलि

संधि पूजा के बाद की गई माँ दुर्गा की आरती

रायपुर। राजधानी रायपुर के कालीबाड़ी समेत तमाम बंगाली दुर्गा पूजा पंडालों में आज संधि पूजा किया गया। ढाक की थाप के बीच अष्टमी से नवमी तिथि के मध्यांतर ये पूजा हुई। रायपुर के बंगाली दुर्गा पंडालों में बंगाल की इस परंपरा का निर्वहन पुरे विधिविधान से किया गया। रायपुर के मुख्य कालीबाड़ी समेत शंकर नगर कालीबाड़ी, पंडरी कालीबाड़ी में भी पारंपरिक ढंग से हुई पूजा के बाद मां चामुंडा की स्तुति की गई। मान्यता है कि अष्टमी तिथि छूटने और नवमी तिथि के प्रारम्भ में ही देवी दुर्गा ने महीषासुर का वध किया था। इसी कालचक्र को संधि कहा जाता है। इसी परंपरा का निर्वहन करते हुए संधि पूजा का विशेष आयोजन बंगाली दुर्गा पंडालो में विशेष तौर पर किया जाता है।


राजधानी के शंकर नगर के सेक्टर 2 में भी संधि पूजा के समय बलि की प्रथा निभाई गई। संधि पूजा के दौरान माता की आराधना चामुंडा स्तुति से की गई। चंडी पाठ करने के बाद माता को 108 कमल के फूल,108 बेलपत्र की माला से पूजा किया गया। इस दौरान 108 का दिया भी प्रज्वलित किया जाता है। दिया को सजाने से लेकर जलाने तक कि प्रक्रिया महिलाओं के द्वारा किया जाता है। संधि पूजा के दौरन माता का श्रृंगार भी विशेष होता है। माता का बिछौना भी तैयार किया जाता है।

इनकी दी जाती है बलि
पंडित द्वारा मंत्रोच्चार के साथ पूजा अर्चना की गई। इस दौरान षोडशोपचार पूजा के बाद रखिया, केला और गन्ने की बलि दी जाती है। संधि पूजा के समय माता के मुख मंडल से रौद्र रूप परिलक्षित होता है। संधिपुजा की समाप्ति के बाद भक्तो के द्वारा पुष्पांजलि दी गई और माता की आरती की गई।