चंद्र ग्रहण : सूतक शुरू…11 बजकर 54 मिनट में शुरू होगा ग्रहण

3 घंटे 49 मिनट तक चलेगा चंद्र ग्रहण

रायपुर। इस सदी के सबसे लंबे चंद्र ग्रहण का सूतक काल दोपहर 02 बजकर 54 मिनट से शुरू हो चूका है। चंद्र ग्रहण की शरुवात ठीक रात 11 बजकर 54 मिनट से शुरू होगा। जो पुरे 3 घंटे 49 मिनट तक चलकर अल सुबह 3 बजकर 49 मिनट में ख़त्म होगा। ग्रहण के दौरान लगने वाले सूतक काल में धार्मिक अनुष्ठान, पूजा पाठ नहीं किए जाते। ऐसी मान्यता है कि सूतक काल के दौरान से ग्रहण की अपवित्रता रहती है। जिसे ग्रहण और सूतक काल की समाप्ति के बाद पवित्र किया जाता है। जिसके बाद धार्मिक अनुष्ठान और पूजा पाठ शरू किए जाते है।
वैज्ञानिकों तथ्यों को अगर देखा जाए चंद्र ग्रहण के समय चंद्रमा हमेशा लाल रंग का दिखाई देता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि चंद्रग्रहण के वक्त सूर्य और चांद के बीच में पृथ्वी आ जाती है। इस वजह से सूर्य की रोशनी रुक जाती है। ऐसी वजह से चंद्रमा का रंग लाल हो जाता है। आज के चंद्र ग्रहण में भी चाँद गहरे लाल रंग का नज़र आने की संभावना है। जिसे राजधानी रायपुर समेत प्रदेशभर में सभी जगह स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।

सूतक में न करें ये काम
ग्रहण के पूर्व लगने वाले सूतक काल में कई कार्य निषेध है। जैसे सूतक के समय पूजा-पाठ, भोजन,पानी, का सेवन नहीं करना चाहिए। वहीँ सूतक काल से पहले जिस बर्तन में पानी या खाद्य पदार्थ के साथ अन्न रखते हों उसमें कुशा और तुलसी के कुछ पत्ते डाल देने चाहिए। पुराणों की मान्यता के मुताबिक चंद्र ग्रहण के समय गर्भवती महिलाओं को ग्रहण की छाया आदि से भी बचना चाहिए।

गुरु पूर्णिमा पर लगा ग्रहण
इस बार गुरु पूर्णिमा के दिन चंद्रग्रहण लग रहा है। यह एक दिव्य संयोग माना जा रहा है। इससे पूर्व 16 साल पहले वर्ष 2000 में ऐसा संयोग बना था। इस अवसर पर स्नान और दान-पुण्य का लाभ सामान्य दिनों से कई गुना अधिक प्राप्त होगा। शास्त्रों के दिशानिर्देश के अनुसार, ग्रहण के मौके पर दान करने के लिए सबसे उत्तम समय वह माना गया है, जब ग्रहण का मोक्ष काल समाप्त हो जाता है।

ये काम होते है शुभ फ़लदायी
कहते है कि ग्रहण काल के बाद दान करना शुभ फलदायी होता है। इस दानपुण्य का अधिक लाभ मिलता है। सोने, चांदी व तांबे के नाग का काले तांबे की प्लेट में रखकर दान करना शुभ माना जाता है। ग्रहण खत्म होने के बाद स्नान कर दान करना चाहिए। वहीं स्नान के बाद घर में स्थापित भगवानों को स्नान करा कर पूजा-पाठ करना चाहिए।