मेयर प्रमोद बोले डीजे साउंड से हो गई मौत, हम मज़बूर थे…

गणेश झांकी के दौरान हुई थी हार्ट अटैक से मौत

रायपुर। राजधानी रायपुर के मेयर ने डीजे की आवाज से राजधानी के 2 बुजुर्गों की मौत का दावा किया है। इस बात का खुलासा करते हुए महापौर प्रमोद दुबे ने इस पूरे मामले में खुद को बेबस और लाचार बताने के साथ ही साथ राज्य सरकार और जिला प्रशासन को भी बेबस बता डाला। जिन नियम, कानून और उसूलों का हवाला देकर महापौर प्रमोद दुबे ने भाजपाई सत्ता की बखिया उधेड़ी थी आज वे उनकी पार्टी की ही सरकार से वे खुद को बेबस बताया है। मेयर प्रमोद ने खुद को बेबस और लाचार बताते हुए जनता से सहयोग की उम्मीद और अपील करते सुनाई दे रहे है।
मीडिया से चर्चा के दौरान नगर निगम में महापौर प्रमोद दुबे ने इस बात का खुलासा किया कि गणेश झांकी के दौरान तेज आवाज में डीजे चलने से रायपुर के दो अलग-अलग स्थानों में दो वयोवृद्ध की हार्टअटैक से मौत हो गई। उन्होंने कहा कि जब गणेश विसर्जन होता है, तो उसमें सैकड़ों झांकियां निकलती है।

                   जिसमें रात 9:00 बजे से लेकर सुबह 7:00 बजे तक झांकियों के सामने लगातार डीजे बजता है। शहर में कई ऐसे लोग है, जो दिल की बीमारी से ग्रसित है। और एक तय मापदंड से ज्यादा डेसिबल की आवाज में अगर डीजे बजता है तो उनके साथ ही बाकि लोगो के लिए भी ये घातक होता है। कई बार यह स्थिति निर्मित होती है इसमें शारदा चौक से लेकर जयस्तंभ चौक, मालवीय रोड, सदर बाजार से पुरानी बस्ती होते हुए इन इलाकों में झांकियां निकलती है। वही इन इलाकों में कई दफे इस तरह की घटनाएं और आकस्मिक मृत्यु भी हो चुकी है। आलम यह रहता है के इन इलाकों में यदि किसी को अटैक आ जाए तो सारे मार्ग लगभग बंद रहते है। जिसमें एंबुलेंस या किसी भी इमरजेंसी गाड़ियों को आने जाने का रास्ता तक देना तक मुनासिब नहीं होता। या यूं कह लें कि मजबूर थे हम जो अपना ही घर जलता देख रहे थे, कुछ इसी तरह की स्थिति हमारी भी थी।

अब अपील कर रहे है मेयर
मेयर प्रमोद दुबे ने कहा कि मैं मीडिया के माध्यम से यह अपील करना चाहता हूं के हर एक व्यक्ति को अपने धार्मिक आस्था के साथ सभी कर्म करने का अधिकार है, लेकिन उन बुजुर्गों के भी जिम्मेदारी और स्वास्थ्य की चिंता भी करना हमारी प्राथमिक जिम्मेदारी है। यह नहीं होना चाहिए कि वह हमारे पिता नहीं है, तो किसी के नहीं है, या उनके पिता है तो हमारे तो नहीं। उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाओं के बाद अक्सर जिला प्रशासन नगर निगम और सरकार को दोषी बनाया जाता है, या कोसा जाता है लेकिन ऐसे मामलों में हम सभी को जागरूक और जिम्मेदार बनकर काम करने की आवश्यकता है।

नितिन सिंघवी ने लगाई थी याचिका
गौरतलब है कि हर साल होने वाले विसर्जन के दौरान प्रशासनिक व्यवस्थाओं को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता नितिन सिंघवी ने हाईकोर्ट से याचिका दाखिल की थी। जिसमे हाईकोर्ट ने इस मामलें में जिलाधीश को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक साडी व्यवस्थाएं संचालित करने का आदेश दिया था, साथ ही उक्त आदेश की अह्वहेलना पर कलेक्टर को दोषी मानने की टिपण्णी की थी।