स्कूलों में मध्यान्ह भोजन के साथ अब मिलेगा स्वादिष्ट नाश्ता

कुपोषण को दूर करने राज्य में शुरू होगी नई पहल

रायपुर| राज्य में बच्चों के पोषण में सुधार लाने राज्य सरकार नित नए प्रयास कर रही है। इसके तहत राज्य सरकार बच्चों को नाष्ता देने का एक फरमान जारी करने जा रही है। हालाकि सरकार इस योजना को पुरे प्रदेष मे एक साथ लागू नही करेगी। सबसे पहले पायलट प्राजेक्ट के तौर पर बिलासपुर और कोरिया जिले से इसकी षुरूआत की जाएगी। सरकारी स्कूलों में नाश्ता देने का प्रस्ताव दो विकासखंडों में बिलासपुर के पेंड्रा और कोरिया के खड़गवां के लिए है। यदी ये प्रोजेक्ट सफल रहा तो इसे दुसरे चरण में पुरे प्रदेष के सरकारी स्कूुलों मे लागू कर दिया जाएगा। बच्चों को सप्ताह में हर दिन नाश्ता मिलेगा।

शासन को भेजा गया प्रस्ताव
अभी मीनू पर अंतिम मुहर लगना बाकी है। आंगनबाड़ी की तर्ज पर नाश्ते में रेडी टू ईट दिया जा सकता है। गौरतलब है कि गुजरात में नाश्ता देने की शुरुआत सबसे पहले हुई थी। बच्चों को कुपोशण से बचाने प्राथमिक शाला के बच्चों को प्रोटीन 20 ग्राम और एनर्जी 450 कैलोरी मिलनी चाहिए। वहीं माध्यमिक स्तर के बच्चों को प्रोटीन 20 ग्राम और एनर्जी 700 कैलोरी मिलनी चाहिए। इसके लिए राज्य में सिर्फ दो विकासखंड में दो करोड़ रुपये का खर्च होगा। लोक शिक्षण संचालनालय के द्वारा प्रस्ताव बनाकर षासन को भेजा गया है। इस पर सहमति मिलते ही दोनो विकसखंडों मे नाश्ता दिए जाने की तैयारी की जाएगी।

अंडे पर फंडा अभी भी जारी
राज्य सरकार ने मध्यान्ह भोजन मे पौश्टीक आहार के तौर पर अंडा परोसने का फरमान जारी किया। लेकिन ये फरमान पुरी तरह से अमल नही हो पाया और इसमे राजनीतिक ग्रहण भी लग गया। विपक्ष और धार्मिक अनुयायियों ने अंडा बच्चो को परोसे जाने पर जोरदार विरोध षुरू कर दिया। ये विरोध सड़क से लेकर सदन तक चली। जो अभी तक थमी नही है। लगता है विवाद पर विराम लगने मे अभी और वक्त लग सकता है। इसमे या तो सरकार पिछे होगी या फिर विरोध का स्वर थम जाएगा। हालाकि वर्तमान में ये तो वक्त के हाशिये पर ही है।