EXCLUSIVE : मध्यान्ह भोजन मे मिलेगा अब सोया दूध पावडर

रायपुर। शिक्षा विभाग को पायलट प्रोजेक्ट मे मिली सफलता के बाद अब सभी सरकारी स्कूलों में कक्षा एक से आठवी तक दिए जाने वाले मध्यान्ह भोजन में सोया दूध दिए जाने की व्यवस्था की गई है। जिसके लिए सभी स्कूलों को निर्देष जारी कर दिया गया है। ताकि सभी बच्चों को पौष्टिक आहार देकर चुस्त किया जा सके।
प्रदेश के सभी प्राइमरी और मिडिल स्कूलों में मिलने वाले मध्यान्ह भोजन में अब छात्र-छात्राओं को मीठा सुगंधित दूध भी मिलेगा। पिछले दिनों हुई मंत्रालय मे षिक्षा विभाग की बैठक में स्कूलों में पौष्टिक दूध सप्लाई पर मुहर लगाइ गई। शासन ने दूध के वितरण की जिम्मेदारी देवभोग सहकारी दुग्ध संघ को सौंपी है। जो तरल दूध के स्थान पर सोया दूध का पावडर दिया जाएगा। सभी सरकारी स्कूलों मे पढ़ने वाले प्राइमरी और मिडिल स्कूल के बच्चों को 150 से 200 एमएल की मात्रा में पाउच वितरित किया जाएगा। आपको बता दें कि 2016-17 के सत्र में विभाग ने पायलट प्रोजेक्ट के तहत सोया दूध का बस्तर में सफल ट्रायल हो चुका है। जिले के 5 ग्रामीण और इतने ही शहरी इलाकों के स्कूलों में छात्र-छात्राओं को सोया दूध दिया गया था। यह प्रयोग कामयाब हुआ है। जिला शिक्षा विभाग के प्रशासक सत्यदेव वर्मा ने कहा कि मध्यान्ह भोजन अंतगर्त चावल दाल सब्जी और 6 दिनों तक अलग अलग मेन्यू में दिया जाता है। साथ ही एक दिन विषेश खीर-पूरी दिया जाता है। अब षासन ने मैन्यू में थोड़ परिवर्तन यिका है जिसमें प्रत्येक बच्चे को 150 से 200 मिलीलीटर पौष्टिक मीठा सोया दूध भी दिया जाएगा। उसे लिकीविड फॉर्म में न देकर पावडर में दिया जाएगा। 27 जिले में लगभग 54 लाख के आस पास बच्चे है जिसमे 1 लाख 89 हजार रायपुर जिले में है। दुग्ध संघ के द्वारा पूर्ति किये जाने की बात कही गई है। कक्षा एक से कक्षा आठवीं तक सभी सरकारी स्कूलों में मध्यान्ह भोजन कार्यक्रम चलाया जाता है। इसके अलावा शहरों और ग्रामीण में में मदरसा है मध्यान भोजन चलाते हैं। इसके साथ ही जितने अनुदान प्राप्त स्कूल है उनमें भी मध्यान भोजन चलाया जाता है।

हैडमास्टर करेंगे मॉनिटरिंग
स्कूलों में दूध वितरण से लेकर मानीटरिंग तक की जिम्मेदारी हैडमास्टरों को सौंपी गई है। इसमें किसी तरह की लापरवाही का सवाल ही नहीं है। पहले बच्चों को पौष्टिक आहार के तहत स्कूलों मे अंडा वितरित करने की बात कही गई थी जो असफल साबित हुआ।