ना उम्मीद रही पुलिस कल्याण और परामर्श दात्री समिति की बैठक

जिलों की सिफ़ारिशें डंप, पुलिस परिवार की मांगे भी दरकिनार

रायपुर। पुलिस कल्याण और परामर्श दात्री समिति की बैठक में पुलिस परिवार की मांगों को दरकिनार कर दिया गया। साथ ही जिलों और रेंज की समितियों से पहुंची सिफारिशों को डस्टबिन में डंप किया गया है। तक़रीबन ढाई घंटे तक चली इस बैठक में रेंज, जिलों से गए प्रस्तावों पर चर्चा तो ज़रूर हुई मगर कोई क्रांक्रीट रिजल्ट नहीं मिल पाया। समितियों की बैठक के बाद हुए फैसले में से पुलिस परिवार की मांग के अनुरूप केवल एक फैसला लिया गया। जिसमें पुलिस अधिकारी / कर्मचारियों के लिए बिलासपुर और दुर्ग में विभाग की ज़मींन पर सामुदायिक भवन / मनोरंजन केन्द्र निर्माण किया जाएगा। जिसे आहिस्ते आहिस्ते रेंज मुख्यालयों और जिला मुख्यालयों तक पहुंचाया जाएगा।
इसके आलावा बैठक में पुलिस कर्मचारियों के वेतन एवं भत्ते, आवास की समुचित व्यवस्था, पेट्रोल भत्ता, पुलिस किट व्यवस्था, ड्यूटी के दौरान मरने वाले कर्मचारी को शहीद का दर्जा और परिवार को 1 करोड़ रुपये की सहायता राशि, परिवार के 1 सदस्य को अनुकम्पा नियुक्ति, अवकाश की पात्रता, पुलिस कर्मचारियों के परिवार का मुफ्त इलाज, ड्यूटी करने का समय 8 घंटे, ओवर टाइम, उच्च मानक के सुरक्षा उपकरण जैसे बुलेट प्रूफ जैकेट व अत्याधुनिक हथियार, तीन प्रमोशन, तृतीय वर्ग कर्मचारियों के ग्रेड पे रुपए 2800 जैसी सभी मांगों को खारिज़ कर दिया गया।

जिलों और रेंज का प्रस्ताव भी डंप
कल्याण समिति और परामर्श दात्री समिति की जिला इकाइयों की तरफ से भी डीजीपी ने सुझाव और प्रस्ताव मँगाए थे। बैठक में कुछ एक जिलों के प्रस्तावों पर चर्चा भी हुई, बावजूद कोई ठोस परिणाम नहीं निकल पाया। खबर है बैठक में सबसे पहले रायपुर रेंज और जिले के प्रस्तावों पर चर्चा हुई। जिसमें एसएसपी अमरेश मिश्रा के प्रस्तावों पर चर्चा की गई। एसएसपी अमरेश ने हर पुलिसवाले को ट्रेनिंग के दौरान ही वाहन चलाने की ट्रेनिंग, वाहन चालक की कमी दूर करने के लिए आरक्षक को युक्तियुक्त करण, पदोन्नति के लिए एक निश्चित अवधि के लिए कोर्स, आवास का क्षेत्रफल बढ़ाने, आरोपियों की पेशी के दौरान होने वाला व्यय नगद देने, हर महीने चालीस लीटर पेट्रोल, 500 रुपए मोबाइल भत्ता, राजधानी में वीआईपी ड्यूटी भत्ता और राजधानी में 50 सीटर ट्रांजिट हॉस्टल बनाने और सभी जिलों में सामुदायिक भवन बनाने का प्रस्ताव था। इनमे केवल सामुदायिक भवन पर अफसरों की तरफ से हरी झंडी मिल पाई।