प्रधानमंत्री कृषि बीमा योजना मे गफलती का निकला तोड़

शिक्षित किसान ने अपने किसान भाईयों को दिलाई बीमा की राशि

रायपुर | पीएम कृषि बीमा की राशि किसानों को मिलने के बाद किसान सम्मान समारोह ग्राम तुलसी में किया गया। बीमा कंपनी की गलती से किसानों को बीमे की राशि नही मिली थी। जिसके लिए किसानों ने 15 माह तक अपने हक के लिए लड़ाई लड़ा और उस में जीत भी हासिल की। किसानों को बीमा की राशि मिलने के बाद गांव में ही किसान सम्मान कार्यक्रम आयोजित कर रायपुर लोकसभा के पूर्व सांसद रमेश बैस और बीज एवं कृषि विकास निगम के पूर्व अध्यक्ष श्याम बैस के साथ किसानों का सम्मान किया गया।
कृषि विभाग के अधिकारियों और बीमा कंपनी के द्वारा लगातार किसानों के साथ धोखा किया जा रहा था। इसका नजारा रायपुर जिले के ग्राम तुलसी में देखने को मिला। तुलसी गांव के किसानों का फसल का बीमा वर्ष 2017 में हुआ था। फसल बीमा के बाद कृषि विभाग बैंक और बीमा कंपनी के द्वारा मिलीभगत से किसानों के नाम को दूसरे गांव में दर्शाया दिया था। जिसके लिए किसानों ने लड़ाई लड़ा और उस लड़ाई में जीत भी हासिल की।

पूर्व मंत्री ने दिया किसानों को साथ
दरअसल किसानों के नेतृत्व करने वाले गांव के ही युवा इंजीनियर योगेश वर्मा ने बीमा कंपनी के पोर्टल से अपने गांव के किसानों से संबंधित जानकारी पहले ही निकाल लिया था। जिसके बाद इस बात का खुलासा हुआ कि किसानों के नाम को एक गांव से दूसरे गांव में बदला गया है। वहां से उसी गांव के किसानों की लड़ाई शुरू हुई और वे जिला मुख्यालय, कृषि उपसंचालक, मंत्रालय और जिला सहकारी बैंक चक्कर काटने लगे। इस दौरान आवेदन और कार्रवाई में लगभग किसानों को 15 माह लग गया। भारी दिक्कतों का सामना करने और लड़ाई लड़ने के बाद किसानों को आखिरकार लगभग 50 लाख के आसपास की राशि किसानों के खाते में डाला गया। किसानों की एकजुटता और लड़ाई से उन्हें जीत मिली। इसे देखते हुए गांव में ही किसान सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। जिसमें लड़ाई लड़ने वाले किसानों का सम्मान किया गया। इस अवसर पर पूर्व केंद्रीय मंत्री रमेश बैस भी मौजूद रहे। उन्होंने भी किसानों की इस लड़ाई में उनका साथ दिया था और केंद्रीय कृषि मंत्री को किसानों के संबंध में पत्र लिखा था। आगे भी किसानों की लड़ाई में उनका साथ देने की बात कही।

बीमा कंपनी की मनमानी हुई उजागर
रायपुर जिले के 3 गांव में ही लगभग 50 लाख के आस-पास का घाटा किसानों को हो रहा था। वही इफको टोकियो बीमा कंपनी के द्वारा प्रदेश में लगभग 21 जिलों में बीमा का काम लिया गया है। इस मुद्दे पर बीज एवं कृषि विकास निगम के पूर्व अध्यक्ष श्याम बैस ने कहा कि कंपनी अपना फायदा पहले देखती हैै। यदि किसान सही समय पर आगे नहीं आते तो उनका लगभग 50 लाख की राशि जो 2017 का है, वह उन्हें नहीं मिल पाता। इसलिए किसानों के लिए माननीय न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाया गया था। किसान यदि एक होकर इस तरह लड़ाई लड़ेंगे कोई भी कंपनी या विभाग किसानों के हक पर डाका नहीं डाल सकते।

इंजिनियर किसान ने दिलाई अन्य किसानों को राहत
किसानों के नेतृत्व करने वाले गांव के युवा और इंजीनियर योगेश वर्मा ने 15 माह में क्या कुछ किया और कितनी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा इसकी जानकारी उन्होंने किसानों को और पूर्व केंद्रीय मंत्री को दी। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री कृषि बीमा योजना में आज भी कई त्रुटियां है। ना तो किसानों को बीमा का कोई रिसिप्ट मिलता और ना ही किसानों के मोबाइल में बीमा का कोई मैसेज आता है। ऐसे में गांव के किसान सरकारी कार्यालय जाकर चेक कर भी नहीं कर सकते थे। लेकिन तुलसी और मानपुर के किसानों ने 15 महीने तक सरकारी कार्यालयों और जिला सहकारी बैंक से लड़ाई लड़कर अपने हक की राशि वापस ली और लड़ाई में कदम से कदम मिलाकर चलते रहे। ऐसे किसान छत्तीसगढ़ की नहीं पूरे देश के लिए भविष्य में मील का पत्थर साबित होंगे। गांव के किसानों के सहयोग से योगेश वर्मा ने वर्ष 2017 की बीमा की राशि बीमा कंपनी से वापस ले ली है। अब वर्ष 2018 में भी कृषि विभाग जिला सहकारी बैंक और बीमा कंपनी के द्वारा मिलकर वही गलती पुनः दोहराया गया है। जिसके लिए भी गांव के किसानों के साथ मिलकर लड़ाई लड़ने और किसानों की राशि को वापस दिलाने के लिए हर संभव प्रयास करने की बात कही गई।