Rath Yatra 2019:दर्शन देने निकले महाप्रभु जगन्नाथ 

मुख्यमंत्री भपेश ने निभाई छेरा पहरा की रस्म

रायपुर | प्रभु जगन्नाथ रथ यात्रा का महापर्व प्रदेश सहित पुरे देशभर में मनाया जा रहा है। भगवान अपने भक्तों को दर्शन देने साल में एक बार मंदिर से निकलते है। आज वही दिन है जब भगवान स्वंय सभी भक्तों के मनोकामना को पूर्ण करने हमारे बीच है। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के सभी जगन्नाथ मंदिरों से रथ यात्रा निकाली जा रही है। राजधानी के स्वामी जगन्नाथ मंदिर गायत्री नगर से भगवान् की रथयात्रा पुरे विधिविधान से निकली।

प्रदेश के मुखिया ने की निभाई चहेरा पहरा की रस्म
भगवान् के रथयात्रा की शरुवात करने प्रदेश के मुखिया भूपेश बघेल पहुंचे और उन्होंने छेरा पहरा की रस्म अदा की। जिसमें सोने के झाडू से मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बुहारी की। छेरा पहरा के रस्म के बाद महाप्रभु अपने भाई और बहन के साथ रथ मे सवार हुए। मंदिर का पूरा माहौल प्रभु जगन्नाथ के जयघोष और करतल से गुंजायमान था। नर्तक दलो के द्वारा प्रभु की अगुवाई की गयी। इस अवसर पर पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह के साथ उनकी धर्मपत्नी वीणा सिंह भी मौजूद रही। सीएम और पूर्व सीएम ने राजनीति से परे हटकर भगवान की षरण मे एक साथ पुजा अर्चना की। इनके आलावा महापौर प्रमोद दूबे,पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल, पूर्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल और अन्य जनप्रतिधि ने रथयात्रा में शामिल होकर रथ खींचे। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और पूर्व सीएम जेउ सिंह ने महाप्रभु से देश और प्रदेश में सुख शांति की कामना की।

महाप्रभु के जयघोष से गूंजा मंदिर
रथयात्रा की शुुरुआत महाप्रभु की जयघोष से की गई। पूरा मंदिर महाप्रभु के जयघोष से गूंज उठा। रथ मेें भगवान जगन्नाथ, माता सुभद्रा और अग्रज बलदाऊ को काफी खूबसूरती से सजाया गया है। इस मौके पर रथयात्रा में रथ खींचने हजारों की संख्या में लोग उमड़े। मंदिर परिसर को हर बार की तरह इस बार भी रमणीय रूप से सजाया गया है। तोरण, ध्वज-पताका से सुसज्जित किया गया है। भगवान को छप्पन भोग चढ़ाया गया। भगवान जगन्नाथ का रथ नंदी घोष, बलदाऊ का रथ तालध्वज और बहन सुभद्रा के रथ देवदलन ये तीनों रथ मंदिर से निकलकर पहले भगवान ने अपने भक्तो को दर्शन दिया और उसके बाद अपनी मौसी रोहिणी से भेंट करने के लिए गुंडीचा मंदिर पहुंच गए। आपको बता दें कि सबसे पहले भाई बलराम जी का रथ प्रस्थान करता है। उसके बाद बहन सुभद्रा जी का रथ रहता है और अंत में लोग जगन्नाथ जी के रथ को बड़े ही श्रद्धापूर्वक खींचते हैं। माना जाता है कि जो लोग इस दौरान एक दूसरे को सहयोग देते हुए रथ खींचते हैं उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है। रथयात्रा का यह अद्भुत महापर्व पूरे 9 दिन तक जोश और उल्लास के साथ चलेगा।