रथयात्रा :- स्वामी जगन्नाथ को ढूंढने जाएंगी माँ लक्ष्मी, अगले रविवार लौटेंगे महाप्रभु

रायपुर। शनिवार को भगवान जगन्नाथ रथ पर सवार होकर नगर भ्रमण पर निकले थे और अपनी मौसी के घर (गुंडिचा मंदिर) विश्राम करने रुके हुए है। जिसके बाद देवशयनी एकादशी तक भगवान जगन्नाथ की पूजा उनकी मौसी के घर पर हो रही है। सुबह-शाम पूजा में श्रद्धालु भी शामिल हो रहे हैं और गजा-मूंग का प्रसाद ग्रहण कर रहे हैं। भगवान अपने भाई बलदेव व बहन सुभद्रा के साथ वापस 22 को मूल मंदिर में लौटेंगे। रथयात्रा के वापस लौटने को बाहुड़ा यात्रा के नाम से जाना जाता है।
भगवान जगन्नाथ रथ पर सवार होकर 14 जुलाई को प्रजा को दर्शन देते हुए मौसी के घर गुंडिचा मंदिर पहुंचे है। जहां वे 9-10 दिन विश्राम करने के बाद 22 जुलाई दशमी तिथि को वापस मूल मंदिर में लौटेंगे। बाहुड़ा यात्रा के लिए ऐसी मान्यता है कि रथयात्रा के तीसरे दिन यानी पंचमी तिथि को देवी लक्ष्मी, भगवान जगन्नाथ को ढूंढते हुए यहां आतीं हैं। तब द्वैतापति दरवाज़ा बंद कर देते हैं और इस कृत्य के कारण देवी लक्ष्मी रुष्ट होकर रथ का पहिया तोड़कर वहां से हेरा गोहिरी साही पुरी नामक एक मुहल्ले में देवी लक्ष्मी मंदिर में लौट जाती हैं। जिसके बाद यहां देवी लक्ष्मी को भगवान जगन्नाथ द्वारा मनाने की परंपरा भी होती है। जिससे के बाद आषढ़ माह के दसवें दिन सभी रथ फिर से मुख्य मंदिर की ओर चलते हैं। जगन्नाथ मंदिर वापस पहुंचने के बाद भी सभी प्रतिमाएं रथ में रहती हैं। देवी-देवताओं के लिए मंदिर के द्वार अगले दिन एकादशी को खोले जाते हैं और उसी के बाद देवी-देवताओं को स्नान करवा कर वैदिक मंत्रोच्चार द्वारा विग्रहों को फिर से प्रतिष्ठित किया जाता है।
इसके अगले दिन देवशयनी एकादशी पर भगवान विष्णु चार माह के लिए क्षीरसागर में विश्राम करने चले जाएंगे। इसके साथ ही मांगलिक एवं शुभ संस्कारों पर रोक लग जाएगी। इसे चातुर्मास कहा जाता है। चातुर्मास के दौरान पूरे चार माह यानी सावन, भादो, क्वांर, कार्तिक माह की एकादशी तक मांगलिक संस्कार नहीं किए जा सकेंगे। मान्यता है कि देवशयनी एकादशी को भगवान विष्णु के क्षीरसागर में प्रस्थान करने के साथ ही शुभ संस्कार नहीं किए जाते। चार माह बाद देवउठनी एकादशी (तुलसी पूजा) के दिन जब देवगण जाएंगे। इसके पश्चात शुभ संस्कार किए जा सकेंगे।

देश टीवी में होगा सीधा प्रसारण
स्वामी जगन्नाथ स्वामी की बाहुड़ा यात्रा का सीधा प्रसारण 22 और 23 तारीख को देश टीवी पर हिंदी कमेंट्री के साथ प्रसारित किया जाएगा। बाहुड़ा यात्रा से जुडी रस्मों का प्रसारण 22 तारीख को किया जाएगा साथ ही 23 तारीख को देवशयनी एकादशी के दिन भगवान् जगन्नाथ के क्षीरसागर में जाने के बाद शयन के लिए की जाने वाली तैयारी और पूजापाठ का प्रसारण भी किया जाएगा। जिसे देखने के लिए अपने टीवी चैनल में ओरटेल कम्युनिकेश के 722 नंबर चैनल और हैथवे / सीसीएन केबल नेटवर्क में 865 नंबर पर देख सकते है। साथ ही हमारी वेबसाइड deshtv.in पर इसका सीधा प्रसारण देखा जा सकता है।