सप्तमी आज : महामाया मंदिर में विधिविधान से होगी महानिशा पूजा

नवरात्री में सप्तमी तिथि का है बेहद खास महत्व

रायपुर। राजधानी रायपुर में प्रत्येक नवरात्रि में माँ महामाया देवी मंदिर में महानिशा पूजा की जाएगी। इस पूजन की जानकारी देते हुए पंडित मनोज शुक्ला ने बताया कि वर्षो से प्राचीन पूजन पद्धति के अनुसार शारदीय नवरात्र की सप्तमी तिथि यानी आज मध्य रात्रि से माँ महामाया की महानिशा पूजा आरंभ होगी। इस पूजा की शुरुवात सर्वप्रथम गणेश जी के पूजन से होती है।

               जिसके बाद शंख, घण्टी, दीप पूजन सहित राजोपचार पूजन पद्धति अनुसार माँ महामाया का पूजन किया जाता है। जिसके बाद दुर्गा सप्तशती पाठ के साथ राजराजेश्वरी महामाया का पंचामृत की अखंड धारा से अभिषेक किया जाता है। पंचामृत स्नान के बाद मातारानी का भव्य सिंगार कर, ब्रह्ममुहूर्त में सुबह 4 बजे आरती की जाती है। जिसके बाद प्रसाद व पंचामृत वितरण के साथ यह पूजन सम्पन्न होगा।

कालरात्रि का होता है अवतार
नवरात्रि के सातवें दिन माता कालरात्रि के स्वरूप में माँ दुर्गा की पूजा की जाती है। देवी कालात्रि को व्यापक रूप से माता देवी – काली, महाकाली, भद्रकाली, भैरवी, मृित्यू, रुद्रानी, चामुंडा, चंडी और दुर्गा के कई विनाशकारी रूपों में से एक माना जाता है। रौद्री और धुमोरना देवी कालात्री के अन्य कम प्रसिद्ध नामों में हैं।

सियासी बाहुबल की करते है कामना
सियासी जीत हार के लिए भी राजनीतिज्ञ शारदीय नवरात्रि में सप्तमी तिथि के दिन विशेष आरधना और पूजा पाठ करते है। लोग अपने विजय के लिए सप्तमी तिथि को माँ बंगलामुखी अनुष्ठान भी करते हैं। पीत वस्त्रों में कुश के आसन पर तथा हल्दी की माला से इसका वृहद अनुष्ठान तांत्रिक इस रात्रि करते हैं।