छत्तीसगढ़ के स्कूलों में होगी शिक्षकों की भर्ती

भर्ती के बावजुद शिक्षाकर्मी संविलियन मुद्दे पर डटे

रायपुर| छत्तीसगढ़ में 20 साल के बाद स्कूल शिक्षा विभाग में शिक्षको की सीधी भर्ती की तैयारी चल रही है।स्कूल शिक्षा विभाग 15 हजार शिक्षकों की भर्ती करने जा रही है। प्रदेश के स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी पिछले कई बरसो से बानी हुई है। पिछले तीन साल से शिक्षाकर्मियों की भर्ती भी नहीं की जा सकी थी। इससे बच्चो की पढ़ाई पर असर होना लाजमी है । बस्तर और सरगुजा समेत प्रदेश के आदिवासी इलाकों में विज्ञान, गणित, कामर्स के शिक्षकों की कमी पूरी करने के लिए पिछली सरकार आउट सोर्सिंग का सहारा ले रही थी। वही नई सरकार ने आउट सोर्सिंग को खत्म करने की घोषणा भी की है। 15 हजार शिक्षकों की भर्ती से विषय शिक्षकों की कमी पूरी होने की उम्मीद की जा रही है। उल्लेखनीय है की छत्तीसगढ़ में शिक्षकों के 36 हजार से अधिक पद खाली है। वर्तमान में 2 लाख के आसपास शिक्षक पढ़ा रहे है। 2018 के विधानसभा चुनाव के पहले कांग्रेस ने शिक्षकों से वादा किया था की सरकार बनने के बाद सबसे पहले उनकी और ध्यान दिया जायेगा। लेकिन सरकार बने 6 माह हो गए लेकिन शिक्षाकर्मियों की मानगो पर भूपेश सरकार की रहमाई नहीं दिखाई दी। इधर स्कुल शिक्षा मंत्री ने स्कूलों में शिक्षकों की भर्ती कर बच्चो के भविष्य को सवारने की बात कही है।

सरकार से शिक्षाकर्मियों की नाराजगी बरक़रार
छत्तीसगढ़ में पंचायत विभाग के अधीन काम करने वाले संविदा शिक्षाकर्मी लम्बे समय तक काम करते रहे। इससे पहले पिछली सरकार ने चुनाव से ऐन पहले शिक्षाकर्मी व्यवस्था खत्म कर दी थी। कहा था कि अब नियमित शिक्षकों की भर्ती की जाएगी। चुनावी साल में शिक्षाकर्मियों ने संविलियन की मांग को लेकर आरपार की लड़ाई लड़ी। आखिरकार सरकार को झुकना पड़ा और तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह को शिक्षाकर्मियों के संविलियन की घोषणा करनी पड़ी। उस वक्त सरकार ने 8 साल की सेवा पूरी कर चुके एक लाख तीन हजार शिक्षाकर्मियों का संविलियन कर उन्हें शिक्षक एलबी नियुक्त किया। सरकार ने शेष बचे करीब 75 हजार शिक्षाकर्मियों का चरणबद्ध संविलियन करने की बात कही। यानी जिसका आठ साल पूरा हो जाएगा वह नियमित हो रहा है। बहरहाल शिक्षाकर्मी इस नए फैसले से असमंजस में है। शिक्षकों की नई भर्ती मामले पर शिक्षक संघ हाईकोर्ट भी पहुच गया है । 21 जून को ही बिलासपुर हाइकोर्ट में सुनवाई हुई है। कुछ शिक्षाकर्मियों द्वारा लगाई गई याचिका में सुनवाई के दौरान कहा गया कि पहले से सेवा दे रहे शिक्षकों के साथ अन्याय नहीं होगा, वो परीक्षा देकर चयनीत होंगे और फिर शिक्षक बनेंगे। इससे वो पदोन्नति के साथ-साथ वरिष्ठता खो देंगे। सरकार को अपना पक्ष रखने के लिए 4 सप्ताह का वक्त हाईकोर्ट से दिया गया है। शिक्षकों को इसी बात की चिंता है। नई भर्ती से शिक्षाकर्मियों को काफी नुकसान होगा। अब शिक्षाकर्मी भूपेश सरकार को अपना वादा यद दिला रहे हैं।

शिक्षाकर्मियों के साथ है भाजपा
इधर राज्य सरकार द्वारा शिक्षकों की भर्ती के पहले शिक्षाकर्मियों के संविलयन को विपक्ष ने भी मुद्दा बनाने का ठान लिया है। नेताप्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने सरकार को आइना दिखाते हुए कहा कि भूपेश सरकार को वादा तो निभाना ही पड़ेगा। धरमलाल ने कहा की सरकार में बैठने से पहले भूपेश बघेल शिक्षाकर्मियों के हमदर्द हुआ करते थे,लेकिन अब शायद भूपेश बघेल मुख्यमंत्री बनने के बाद अपने वादे को भूल गए है। अब भाजपा भी शिक्षाकर्मियों का साथ देकर उनकी मांगो का समर्थन करेगी। बहरहाल ऐसे में अंदेशा है कि नई सरकार द्वारा नए शिक्षकों की भर्ती से पहले उपजी नाराजगी, सियासत को जन्म दे सकती है।

संबंधित पोस्ट

बेहतर स्वास्थ्य सुविधा देने होंगे बजट में कई प्रावधान…मंत्री सिंहदेव ने सौंपे प्रस्ताव

गणतंत्र दिवस : रायपुर में राज्यपाल करेंगी ध्वजारोहण, जगदलपुर जाएंगे CM भूपेश

बजट 2020 के सीएम ने की चर्चा, कृषि एवं जलसंसाधन मंत्री ने दिए प्रस्ताव

नक्सल प्रभावित इलाकों में आदिवासियों पर दर्ज़ 215 प्रकरण हुए वापस

सीएम हाउस में हुई भूपेश कैबिनेट की बैठक

शिक्षाकर्मी बनने बन गए थे बहरे, फ़र्ज़ी निकला प्रमाण पत्र दो गिरफ़्तार…

लोकवाणी : स्वाभिमान, अस्मिता और नई ऊर्जा से प्रारंभ हुआ आगे बढ़ने का नया दौर

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बॉयो-एथेनॉल के लिए नीति आयोग को लिखा पत्र

छत्तीसगढ़ में आज है अन्न दान का महापर्व छेरछेरा

छत्तीसगढ़ खेल विकास प्राधिकरण का गठन

भक्त राजिम माता जयंती पर सीएम की सौगात, मेला स्थल में बनेगा राजिम माता भवन

सीएम भूपेश के निर्देश – वेंटिलेटर, आई.सी.यू. और ऑपरेशन थेएटर रखें अपडेट