बाजार सर्वेक्षण की प्रक्रिया से वनवासियों और ग्रामीणों को मिलेंगे अतिरिक्त आय

वन विभाग द्वारा सर्वेक्षकों को दिया जायेगा विशेष प्रशिक्षण

रायपुर | छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार आते ही नरवा,गरुआ,घुरवा और बाड़ी का कॉन्सेप्ट को साकार किया जा रहा है।चार चिन्हारी पर प्रदेश सरकार काम कर रही है। इसी के अनुरूप प्रदेश के वन क्षेत्रो में निवासरत लोगो को और अधिक आय के स्रोत देने सरकार ने ध्यान देना शुरू कर दिया है। प्रदेश के मुखिया भूपेश बघेल की मंशा के अनुरूप छत्तीसगढ़ में प्रचुर मात्रा में मिलने वाले लघु वनोपज से वनवासियों और ग्रामीणों को अतिरिक्त आय के साधन सृजित करने बाजार सर्वेक्षण की प्रक्रिया शुरू हो गई है। वन मंत्री मोहम्मद अकबर की विशेष पहल पर राज्य में लघु वनोपज आधारित बाजार व्यवस्था का अध्ययन करने और लघु वनोपज आधारित उद्योग विकास की रणनीति निर्धारित करने के लिए वनांचल के हाट बाजारों का सर्वेक्षण किया जाएगा। इसके लिए छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ रायपुर द्वारा पहल शुरू करते हुए 480 सर्वेक्षकों को प्रशिक्षण दिया गया। इनमें वन कर्मचारी, प्रबंधक, फड़ मुंशी, छोटे व्यापारी आदि प्रशिक्षक शामिल थे। लघु वनोपज के अंतर्गत बाजार सर्वेक्षण भी किया गया । इसके साथ ही सर्वेक्षण के बाद भविष्य में प्रणाली निर्धारित कर वनोपज कार्य में जुड़ने के इच्छुक समूह तथा प्रगतिशील उद्यमियों को प्रोत्साहित करने का भी प्रावधान सरकार ने रखा है।

चिन्हांकित हाट बाज़ारो का सर्वेक्षण
छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ के द्वारा वनांचल सीमा से लगे हुए हाट बाजारों को चिन्हित किया जायेगा। प्रत्येक हाट बाजार में क्रय किए जाने वाले लघु वनोपज, मात्रा, स्थानीय दर, स्थानीय एवं बाहरी व्यापारी संबंधी विवरण एवं प्रसंस्करण संबंधी जानकारी के साथ ही जिले में इनसे संबंधित उद्योग की जानकारी वन अधिकारी एकत्रित करेंगे। सर्वेक्षण के दौरान हाट बाजार तथा गोदाम की जियो टैगिंग भी की जाएगी। जिसके आधार पर भविष्य की रणनीति बनाई जाएगी। सर्वेक्षण में मिली जानकारी का प्रत्येक जिला यूनियन स्तर पर विश्लेषण के बाद लघु वनोपज क्रय के लिए हाट बाजार का चयन, प्रसंस्करण के लिए वन धन विकास केन्द्र की स्थापना की जाएगी।

छोटे और बड़े हाट बाजार का होगा संचालन
सर्वेक्षण के बाद लघु वनोपज क्रय केन्द्र वन धन विकास केन्द्र का संचालन राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन, जिला पंचायत तथा महिला बाल विकास द्वारा गठित महिला समूहों के माध्यम से किया जाएगा। इसके लिए चयनित समूहों को प्रशिक्षण तथा अन्य सुविधाएं मुहैया करायी जाएगी। चयनित केन्द्रों के माध्यम से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर 20 प्रकार के लघु वनोपज- इमली बीज, साल बीज, महुआ बीज, चिरौंजी गुठली, हर्रा, रंगीनी लाख, कुसुमी लाख, गम कराया (कुलु गोंद), नागरमोथा, शहद, बहेड़ा, बेल गुदा, कालमेघ, फूल झाडू, पुवाड़ बीज, महुआ फूल (सूखा), जामुन गुठली (सूखा), कौंच बीज, धवई फूल (सूखा) करंज बीज लघु वनोपज क्रय किया जाएगा।